Posts

स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

अहमदाबाद 8.2.17

ahmedabad1

ahmedabad2

कहते हैं कि बालक-बालिकाओं में हुनर की कमी नहीं होती, जरूरत होती है उसे तराशने की, सही मार्गदर्शन की। एक बार उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वो अपनी मंजिल खुद ही बना लेती हैं। ऐसी ही एक नेत्रहीन बालिका हैं कलगी रावल। कलगी जन्मजात नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरे अपने पास फटकने नहीं दिया। 10 वीं परीक्षा डायरेक्ट दीं और 76 फीसद अंकों से उतीर्ण हुईं। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका जाकर 10000 ऑडियंस के बीच अपनी बात को रखा। रेडियो जॉकी के रूप में काम किया। सुगम्य भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने जैसी बालिकाओं की सेवा करने की ठानी है और कल्गी फाउंडेशन के जरीए यह काम कर रही हैं। गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली कलगी के इसी आत्मविश्वास ने उन्हें स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर बनाया है। भारत भ्रमण पर निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने अभियान के लिए कलगी को चुना है। इस बावत कलगी ने कहा कि उन्हें स्वस्थ भारत के इस अभियान के बारे में जानकर बहुत खुश हूं, साथ ही इसका हिस्सा बनना मेरे लिए आनंद का विषय है।

ahmedabad3

ahmedabad4
बापुनगर के बालिकाओं ने लिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प
गुजरात के अहमदाबाद स्थित बापूनगर में स्वस्थ भारत यात्रा दल ने वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिका स्वास्थ्य की स्थिति बहुत दयनीय है. जबतक हम बालिकाओं में प्राथमिक स्तर से ही स्वास्थ्य चिंतन का बीच नहीं बो देंगे तब तक सही मायने में स्वास्थ्य धारा का प्रवाह नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य हमारा मौलिक अधिकार है। ऐसे हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना, अपने परिवार को रखना ही सही मायने में न्याय है। प्लेटो के न्याय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी स्वास्थ्य को नहीं बचायेंगे तो हम अपने, अपने परिवार एवं राष्ट्र के प्रति न्याय नहीं कर पायेंगे। भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू की गई इस यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में जाकर बालिकाओं से संवाद करने का संकल्प लिया है। इस अवसर पर वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने सुंदर गीत-संगीत प्रस्तुत किया। कलगी रावल को इस मंच से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। कॉलेज की प्रधानाचार्य किंजलबेन कथिरिया, अल्काबेन सिरोया, हिम्मतभाई, प्रफुल्ल भाई सावलिया, सामाजिक कार्यकर्ता संजय भाई बेंगानी, भूषणभाई कुलकर्णी, सत्यनारायम वैष्णव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी को यात्रा दल ने दी श्रद्धांजलि

अहमदाबाद का नाम रौशन करने वाले शहीद ऋषिकेश रामाणी की प्रतिमा पर जाकर यात्रा दल ने उन्हें सलामी दी। साथ ही उनके नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल का दौरा भी किया। शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रमाणी स्कूल को वल्लभभाई ने गोद लिया है। वल्लभभाई के प्रति वहां के छात्रों में अपार स्नेह देखने को मिला। स्वस्थ भारत के आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें अपनी पत्रिका भेंट की और यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर शहीद के पिता वल्लभभाई रमाणी एवं शहीद के नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल के प्राचार्य, रवि पटेल सहित शहर के कई लोग उपस्थित थे।

गोधरा ने भी किया स्वागत

देश के लोगों के मन में गोधरा को लेकर एक संशय की स्थिति आज भी बनी हुई है। लेकिन जिस अंदाज में गोधरा ने स्वस्थ भारत यात्रा का स्वागत किया व अतुलनीय है। गोधरा के स्थानीय पत्रकार रामजानी ए रहीम ने यात्रा दल को पंचमहल के जिला निगम अधिकारी एम.एस गडवी से मिलवाया। उनके सहयोग से यात्रा दल गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर बालिका विद्यालय में जाकर स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश दिया। इस स्कूल की बालिकाओं की परवरिश स्वस्थ तरीके से होते देख स्कूल प्रबंधन को स्वस्थ भारत की ओर से आशुतोष कुमार सिंह ने साधुवाद दिया। यात्रा दल में वरिष्ठ गांधीवादी लेखक एवं पत्रकार कुमार कृष्णनन एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार रोहिल्ला भी श्री आशुतोष के साथ हैं।

गौरतलब है कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वस्थ भारत की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकली है। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देने निकली इस टीम को गांधी स्मृति दर्शन समित, स्पंदन, नेस्टिवा, राजकमल प्रकाशन समूह, संवाद मीडिया, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर, हेल्प एंड होप, जलधारा, वर्ल्ड टीवी न्यूज, आर्यावर्त लाईव सहित कई समाजसेवी संस्थाओं एवं मीडिया मित्रो सहयोग एवं समर्थन प्राप्त है।
#SwasthBalikaSwasthSamaj
#KnowYourMedicine
#SwasthBharatAbhiyan
नोटः यात्रा अहमदाबाद के बाद सूरत की ओर कूच कर गयी है। उसके बाद यात्रा मुंबई पहुंचेगी। संपर्क-9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

jhabua-1

jhabua-2

jhabua-3

jhabua-4

jhabua-5

jhabua-6

jhabua-7

भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

#SwasthBharatYatra
#SwasthBalikaSwasthSamaj
#Knowyourmedicine
#SwasthBharat
#SwasthBharatAbhiyan
संपर्क
9891228151

स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

wellness_model

स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

——-प्रभांशु ओझा 

यह बात निर्विवाद है कि भारत में आजादी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर उचित ध्यान नहीं दिया गया. यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियां साल दर साल बीतने के बाद बढ़ती ही चली गयी हैं. वर्तमान सरकार जिन वैश्विक हालातों में सत्ता में आयी, उसमें नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराना सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दा ही नहीं था, बल्कि इसके लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से भारत पर दबाव भी था. संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर भारत ने इस प्रतिबद्धता के साथ हस्ताक्षर भी किये हैं कि भारत नागरिकों को ‘यूनिवर्सल हेल्थ केयर’ देने की दिशा में हो रही वैश्विक प्रगति के अनुरूप प्रयास करेगा. जाहिर था कि वर्तमान केंद्र सरकार के लिये यह कठिन चुनौती थी. लेकिन अब तक के कार्यकाल में किये गये प्रयासों से यह समझना मुश्किल नहीं है कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की हालत सुधारने के लिये गंभीरता से प्रयासरत है. उसने न सिर्फ इस दौरान महत्वपूर्ण योजनायें आरम्भ की हैं, बल्कि स्वास्थ्य स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे और बदलती जरूरतों को समझने का भी माद्दा दिखाया है.     

नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार इस बात की वकालत की है कि सरकार का आदर्श लक्ष्य सभी नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करना है. इस प्रतिबद्धता के अनुरूप ही सरकार ने तकनीकी तौर पर नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन के तहत नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य स्वीकार किया. हालांकि इसका नीतिगत रूप अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन उम्मीद की जा रही कि भारत जल्द ही इसको स्पष्ट करते हुये लागू कर देगा. स्पष्ट है कि केंद्र सरकार अब तक सभी नागरिकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराने की अपनी प्रतिबद्धता से मुकरी नहीं है.

मिशन कायाकल्‍प की शुरूआत

कायाकल्प सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक अहम पहल है. इस पहल को सार्वजनिक सुविधाओं में स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभ किया गया है। पहल के तहत  सार्वजनिक   स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का मूल्‍यांकन किया जाएगा और ऐसी सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं जो स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण के नवाचारों के असाधारण प्रदर्शन वाले मानदंडों को प्राप्‍त करेंगी उन्‍हें पुरस्‍कार और सराहना प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्‍त सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य  सुविधाओं में  स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए स्‍वच्‍छता दिशा-निर्देश 15 मई 2015 को जारी किये गये थे। ये दिशानिर्देश सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में स्‍वच्‍छता को लेकर योजना निर्माण, बारंबारता, पद्धतियों , निगरानी आदि पर विस्‍तार से जानकारी मुहैया कराते हैं।

किलकारी एवं मोबाईल अकादमी

images

गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों के माता-पिता और क्षेत्र कार्यकर्ताओं के बीच नवजात देखभाल(एएनसी),  संस्‍थागत प्रसव, नवजात पश्‍चात देखभाल (पीएनसी) एवं प्रतिरोधन के महत्‍व के बारे में उचित जागरूकता सृजित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से देशभर में किलकारी एवं मोबाईल अकादमी सेवाएं क्रियान्‍वित  करने का फैसला किया गया है। पहले चरण में 6 राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्‍था न (एचपीडी) और मध्‍य प्रदेश में किलकारी प्रारंभ की जाएगी। चार राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, राजस्‍थान एवं मध्‍य प्रदेश में मोबाईल अकादमी की शुरूआत की जाएगी।

किलकारी एक इंटरएक्टिव वॉइस रिस्‍पोन्‍स (आईवीआर) आधारित मोबाईल सेवा है, जो सीधे गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों की माताओं एवं उनके परिवारों के मोबाईल फोन पर गर्भावस्‍था एवं शिशु स्‍वास्‍थ्‍य  के बारे में टाईम- सेन्‍सिटीव ऑडियो मैसेज (वॉइस कॉल) भेजती है।

राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला- दक्ष

स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के कौशल में सुधार लाने के लिए गुणवत्ता वाली  सेवाएं (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य) प्रदान करने के लिए केंद्र  सरकार ने लिवरपूल ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसटीएम) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र  में पांच राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला “दक्ष” की स्थापना कर एक बड़ा कदम उठाया। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं में कुशल कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सेवा पूर्व प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और सतत नर्सिंग शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशालाओं  को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ा जा रहा है। 30 स्टैंड- अलोन कौशल प्रयोगशालाओं को गुजरात, हरियाणा , बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे अलग-अलग राज्यों में स्थापित किया गया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि केंद्र सरकार की यह पहल महिलाओं का जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है.

तम्बाकू उत्पादों पर सख्ती

केंद्र सरकार ने जब तम्बाकू उत्पादों के 85 फीसदी हिस्से पर चित्रित चेतावनियां छापने को अनिवार्य किया तो उम्मीद की जा रही थी कि देश का तम्बाकू कारोबार सरकार पर निर्णय बदलने का दबाव बनायेगा. लेकिन केंद्र सरकार ने इस फैसले पर कायम रहते हुये समाज और देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी. केंद्र सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा सबसे साहसी था. यह गौर तलब है कि सरकार के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी मुहर लगायी. कुछ दिनों पहले अपने निर्णय में न्यायालय ने कहा कि सिगरेट निर्माता कंपनियों को केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत सिगरेट पैकेट के 85 फीसदी हिस्‍से पर वैधानिक चेतावनी देनी ही होगी। स्पष्ट है कि तम्बाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की समाज की तरफ कुछ जिम्मेदारी भी है। जितना ज्यादा तम्बाकू उत्पाद के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को प्रचारित किया जाएगा उतना ही ज्यादा भारतीयों के जीवन को बचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति- एक क्रांतिकारी कदम

केंद्र सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक महत्वपूर्ण पहल देश की पहली  राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति पेश कर की. नीति का उद्देश्य सभी स्तरों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ाना तथा मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व को सुदृढ़ करके मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को व्यापक स्तर पर ले जाना था। वर्तमान में भारत में सिर्फ समाज के उच्च वर्ग में ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता है, लेकिन इस नीति से पहली बात देश में निर्धन तबकों को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा.

यह गौर करने वाली बात है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों की देखभाल के लिए बनाए गए पूर्व कानून जैसे भारतीय पागलखाना अधिनियम, 1858 और भारतीय पागलपन अधिनियम, 1912 में मानवाधिकार के पहलू की उपेक्षा की गई थी और केवल पागलखाने में भर्ती म‍रीजों पर ही विचार किया गया था। आजादी के बाद भारत में इस संबंध में पहला कानून बनाने में 31 वर्ष का समय लगा और उसके 9 वर्ष के उपरांत मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिनियम, 1987 अस्तित्‍व में आया। परंतु इस अधिनियम में कई खामियां होने के कारण इसे कभी भी किसी राज्‍य एवं केंद्र शासित प्रदेश में लागू नहीं किया गया। जाहिर है कि भारत में नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने के लिये एक नीति की आवश्यकता लगातार बनी हुयी थी.

नये मेडिकल संस्थानों की पहल

भारत में अच्छी गुणवत्ता और सेवाओं वाले मेडिकल संस्थानों की कमी एक बड़ी समस्या है. केंद्र सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिये उल्लेखनीय प्रयास किये हैं. इसके लिये केंद्र सरकार ने भारत के कुछ चुनिंदा जिला स्वास्थ्य केन्द्रों को केंद्र मेडिकल कालेज में परिवर्तित करने की योजना बनायी है। इसे चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार तथा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। भारत के कुल 671 जिलों में से 58 जिलों में, जिनमे अभी तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है , सर्वप्रथम उन जिला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित करने की योजना है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कम से कम 100 सीटें होंगी। सरकार ने अपने कार्यकाल में 150 जिला अस्पतालों को परिवर्तित करने का लक्ष्य बनाया है।

जानकारों की मानें तो भारत में एक मेडिकल कॉलेज बनाने पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत आती है। सरकार ने इस लागत का 25 प्रतिशत राज्य सरकारों के हिस्से में तय किया है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में लागत की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होगी, बाकि बचे 85 प्रतिशत केंद्र द्वारा मुहैय्या कराए जाएंगे। इस योजना के पहले चरण में 22 जिला अस्पतालों को मंजूरी मिल चुकी है तथा पहली किश्त के तौर पे 144 करोड़ रूपए भी जारी कर दिए गए हैं. संकेत हैं कि संसाधन कम होने पर यह योजना PPP मॉडल के अनुसार भी लागू हो सकती है। उस स्थिति में मेडिकल कॉलेज में निवेश निजी क्षेत्र करेगा। केंद्र सरकार की इस योजना से समाज के एक बड़े समूह को सुविधायें मुहैया करायी जा सकेंगी.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अन्य उपलब्धियां और चुनौतियां

वास्तव में केंद्र सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. सरकार द्वारा इबोला और जीका वायरस से निपटने के प्रयासों को भी देश में हर तरफ से प्रशंसा मिली है. बावजूद इसके स्वास्थ्य क्षेत्र में चुनौतियां अब भी बरक़रार हैं. सबसे बड़ी चुनौती है स्वास्थ्य पर खर्च होने वाले बजट 1.04 ( सकल घरेलू उत्पाद)  को बढ़ाना और उसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी तय करना. भारत पर अब अपने स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने का वैश्विक दबाव भी है. उम्मीद की जा सकती है कि केंद्र सरकार इन चुनौतियों से सही योजना और नजरिये से निपटेगी.

पीएचसी, सीएचसी में हो नियमित नियुक्तिः डॉ. लोकेश दवे

अगर प्रत्येक प्राथमिक स्वस्थ केन्द्र पर सरकार एक आयुष डॉक्टर, एक फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन और दो नर्स को  नियुक्त कर दे तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा बेहतर तरीके से चलाई जा सकती है। यह कहना है कि झाबुआ के आयुष चिकित्सक लोेकेश दवे का…

गांव में इलाज़ करते डॉ लोकेश

गांव में इलाज़ करते डॉ लोकेश

  लोकेश दवे मध्य प्रदेश स्थित झाबुआ ज़िले में आरबीएसके कार्यक्रम में तैनात हैं। कार्यक्रम के तहत उन्हें आंगनबाड़ी व प्राइमरी स्कूल के बच्चों के स्वास्थ्य जांच करनी होती है। डॉ. लोकेश दवे के अनुसार मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा नगण्य है। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो हैं पर ज्यादातर पीएचसी/ सीएचसी में डॉक्टर की तैनाती नहीं है। एम.बी.बी.एस डॉक्टर गावं नहीं जाना चाहते। झाबुआ जिले के ग्रामीण पूरी तरह झोला छाप चिकित्सकों के ऊपर आश्रित हैं। कई लोगों ने जानें भी गवाई हैं। डॉ. लोकेश कहते है कि देश भर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लगभग यही हाल है। सरकार एम.बी.बी.एस डॉक्टरों की कमी का रोना रोती रहती है लेकिन इससे समाधान तो नहीं होगा न। सरकारों को सोचना होगा कि आखिर वे कबतक जुगाड़ पर अनुबंध के चिकित्सा कर्मिओं से काम चलायेंगे ? जग जाहिर है कि देश में लगभग अस्सी फीसदी स्वास्थ्य व्यवस्था को चलाने का ज़िम्मा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन पर है। एनआरएचएम की योज़नाओं में काम कर रहे आयुष चिकित्सक अपनी क्षमता से बढ़कर प्रदर्शन कर रहे हैं। डॉ. लोकेश स्वस्थ भारत अभियान के साथ आयुष चिकित्सकों के साथ होने वाले भेदभाव को साझा करते हुए कहते हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की विभिन्न योज़नाओं में लगे आयुष चिकित्सकों को मिलने वाला वेतन देखा जाए तो एक चतुर्थ वर्गीय शासकीय कर्मचारी के समान ही है। इसके अलावा लगातार हो रहे मानसिक शोषण की वज़ह से कई आयुष चिकित्सक नौकरी छोड़ चुके हैं। कई-कई बार कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत आयुष चिकित्सकों के साथ नियमित नौकरी वाले एमबीबीएस डॉक्टर ठीक से बर्ताव नहीं करते। एनआरएचएम स्वास्थ्य कर्मियों को हर साल अनुबंध की अवधी बढ़ाने को लेकर रिश्वत देनी पड़ती है। तमाम समस्याओं से जूझते हुए भी आयुष चिकित्सक अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। इनके सेवा भाव में कभी कोई कमी नहीं आती।

समाधान की दिशा में बात को आगे बढ़ाते हुए वे कहते हैं कि राज्य की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवथा के लिए दोषी खुद सरकार ही है। अगर सरकारें मौजूदा संसाधनों का इस्तेमाल सही दिशा में करे और एनआरएचएम योज़ना में कार्यरत आयुष डॉक्टरों व कर्मचारिओं को सभी पीएचसी / सीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में नियमित रूप से तैनात कर दे तो सरकार और कर्मचारियों दोनों की ही समस्याओं का हल संभव है। सरकारी योज़नाओं को बड़ी ही आसानी से इम्प्लीमेंट किया जा सकता है। सरकार के पास न तो धन की समस्या है और ना ही मैन पावर की। बस मंशा होनी चाहिए और एक ईमानदार पहल।

 

चिकित्सक संवेदनशील बनें

देश के गरीबों को ध्‍यान में रखें चिकित्सकः प्रधानमंत्री

स्‍नातकोत्‍तर चिकित्‍सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्‍थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 34वें दीक्षांत समरोह में पहुंचे प्रधानमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री

इस मौके पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश भर के 70 मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्‍पेशलियटी ब्‍लॉक बनाए जा रहे हैं, 58 जिला अस्‍पतालों को मेडिकल कॉलेजों में बदला जा रहा है और 20 राज्‍य कैंसर संस्‍थानों और 50 त्रिस्‍तरीय कैंसर सुविधा केंद्रों का गठन किया जा रहा है।

 

चिकित्सक संवेदनशील बनें

चिकित्सकों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री

नई दिल्ली/ स्‍नातकोत्‍तर चिकित्‍सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्‍थान (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ के 34वें दीक्षांत समरोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने उत्‍तीर्ण छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यशील जीवन के दौरान देश के गरीबों को ध्‍यान में रखें। उन्‍होंने उत्‍तीर्ण छात्रों को याद दिलाया कि यह दीक्षांत समारोह है न कि शिक्षांत समारोह और यहां उनकी शिक्षा का अंत नहीं होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यह ऐसा अवसर है कि जहां वे किताबों की दुनिया से निकलकर असली दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सर्वांगीण स्‍वास्‍थ्‍य सेवा संबंधी विश्‍व रुझानों का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने उत्‍तीर्ण छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल बीमारी का इलाज न करें बल्‍कि मरीजों के साथ निकट का संबंध भी रखें। समारोह में निकट के सरकारी स्‍कूलों के बच्‍चों की उपस्‍थिति को देखकर प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बच्‍चे ही इस अवसर पर असली विशेष अतिथि हैं। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि यह अवसर बच्‍चों को प्रेरित करेगा।

भारत के स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा उत्तीर्ण छात्रों के संबोधित करते हुए

भारत के स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा उत्तीर्ण छात्रों के संबोधित करते हुए

स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने इस अवसर उत्‍तीर्ण चिकित्‍सकों से आग्रह किया कि वे गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्ग के लोगों के प्रति सहानुभूति और करुणा का भाव रखें तथा अपने काम में उत्‍कृष्‍टता पैदा करें। उन्‍होंने कहा कि चिकित्‍सकों को जरूरतमंद लोगों के कल्‍याण के लिए अथक कार्य करना चाहिए। दीक्षांत समारोह में 500 से अधिक छात्रों ने स्‍नातकोत्‍तर डिग्री प्राप्‍त की। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ मरीजों की देखभाल, चिकित्‍सा शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को लगातार उन्‍नत कर रहा है। उन्‍होंने कहा कि देश भर के 70 मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्‍पेशलियटी ब्‍लॉक बनाए जा रहे हैं और इस तरह मौजूदा मेडिकल कॉलेजों का विकास किया जा रहा है। उन्‍होंने बताया कि 58 जिला अस्‍पतालों को मेडिकल कॉलेजों में बदलकर देश के मेडिकल कॉलेजों के नेटवर्क को विस्‍तार दिया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि 20 राज्‍य कैंसर संस्‍थानों और 50 त्रिस्‍तरीय कैंसर सुविधा केंद्रों का गठन किया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि देश के प्रत्‍येक नागरिक को बेहतरीन त्रिस्‍तरीय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध कराने का सरकार का विजन है।

पीजीआईएमईआर द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि यह संस्‍थान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के विजन को हासिल करने की दिशा में अग्रसर है। उन्‍होंने बताया कि पीजीआईएमईआर ई-अस्‍पताल को क्रियान्‍वित कर रहा है। ऑनलाइन ओपीडी रजिस्‍ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गई है और संस्‍थान निदान सेवाओं तथा समयबद्ध तरीके से भुगतान सुविधाएं शुरू कर रहा है। इन सुविधाओं के शुरू हो जाने पर मरीजों का समय बचेगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने संस्‍थान के प्रशासन से आग्रह किया कि वे अस्‍पताल में स्‍वच्‍छता को प्रोत्‍साहन देने के लिए अभी हाल में शुरू की जाने वाली ‘कायाकल्‍प’ योजना में सक्रिय हिस्‍सा लें।

इस अवसर पर पंजाब एवं हरियाणा के माननीय राज्‍यपाल प्रो. कप्‍तान सिंह, चंडीगढ़ से सांसद श्रीमती किरण खेर, स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण सचिव श्री भानु प्रताप शर्मा और पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. योगेश चावला भी उपस्‍थित थे। (सोर्सःपीआईबी)

दीक्षांत समारोह की झलकियां…

प्रधानमंत्री व स्वास्थ्यमंत्री साथ-साथ

प्रधानमंत्री व स्वास्थ्यमंत्री साथ-साथ

प्रधानमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री छात्रों को सम्मानित करते हुए...

प्रधानमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री छात्रों को सम्मानित करते हुए…

 

Top-selling 100 drugs to get cheaper soon

स्वस्थ भारत अभियान की नींव ही दवाइयों की बढ़ी/बढ़ाई गयी  कीमतों को कंट्रोल करवाने के लिए पड़ी है। पिछले तीन वर्षों में कुछ हद तक कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस कैंपन सफल हुआ है। अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। हमारा प्रयास है धीरे-धीरे दवा नीति की अनसुलझी गुत्तथियों को सुलझाने में जनता व सरकार की हम मदद करें। इस संदर्भ में टीओआई में प्रकाशित यह खबर सुकुनदायी है। संपादक

Price cut likely for top-selling medicines

स्वस्थ भारत अभियान द्वारा कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिम रिटेल प्राइस कैंपेन का असर दिखने लगा है...

स्वस्थ भारत अभियान द्वारा कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिम रिटेल प्राइस कैंपेन का असर दिखने लगा है…

NEW DELHI: Top selling medicine brands for stress, hypertension, HIV, pain and pneumonia may soon become cheaper. The drug price regulator National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) is set to bring in at least 100 new drugs under price control to include combinations, dosages and strengths that are commonly prescribed by doctors and sold by pharmacists.

For instance, currently only one strength of Paracetamol is under price control, whereas NPPA has proposed to cap prices of all brands of the medicine as listed in the Indian Pharmacopeia. Similarly, in case of Nelfinavir and Ritonavir, commonly used antiretrovirals in treatment of HIV, the regulator plans to fix prices of tablets along with capsules.

The move is significant because this is the second time NPPA has attempted to slash prices of drugs that are outside the National List of Essential Medicines (NLEM), 2011. In May, the pricing authority had invoked a public interest clause to reduce prices of 108 medicines. However, it had to withdraw the guidelines after companies approached court and the law ministry opined that using the clause may be out of context.

However, official sources say, this time there is political consensus on the issue, mainly ahead of upcoming assembly elections in some states.

Currently, the government regulates prices of only 348 medicine formulations or 652 packs as listed in the NLEM. However, the list includes only specific dosages, strengths and combinations of medicine formulation. The regulator is of the view that this loophole does not ensure price regulation of all life saving and essential medicines of mass consumption.

The latest move of NPPA is aimed at expanding the span of price control to include medicines dosages, strengths and combinations which are commonly used and have high market share in terms of sales.

Recently, the pricing authority conducted a detailed study that revealed presence of certain “anomalies or discrepancies” in specification or description in the NLEM 2011. Following the findings of the study conducted across the country, the NPPA has proposed rectification in the NLEM.

The move has created a stir among pharmaceutical companies who are concerned about stressed margins as well as instability promoted through such periodic price changes. “Mass consumption is not a criterion for NLEM. It would be desirable that the selection of drugs is left to the core committee of experts as per the established criteria. The role of the NPPA is to implement the policy in letter and spirit and not create confusion leading to instability,” says D G Shah, secretary general, Indian Pharmaceutical Alliance

According to a senior official in the department of pharma, the proposal for changes in the list of essential medicines has been sent to the health ministry which has the ultimate authority to revise the same. Besides, NPPA has also sought comments from other stakeholders such as patient groups and drug manufacturers.

According to a senior official in the department of pharma, the proposal for changes in the list of essential medicines has been sent to the health ministry which has the ultimate authority to revise the same. Besides, NPPA has also sought comments from other stakeholders such as patient groups and drug manufacturers.

Courtesy: Times Of India, Jaipur 15.11.2014