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अच्छे डॉक्टर मिल जाए तो जिंदगी बदल जाती है…ऐसी ही यह कहानी हैं…देखें चार मिनट में…

डॉ. मनीष कुमार, न्यूरो सर्जन हैं। वे हमेशा इस तरह का काम करते रहते हैं कि सुनकर विश्वास न हो। इस बार उन्होंने ट्राइजैमनल न्यूरोलजिया की एक मरीज की सर्जरी की है। पांच दिनों में वो बिल्कुल ठीक हो गई। क्या कहती है मरीज, आप खुद सुनिए उसके जुबानी…

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अगर मगर के डगर में स्वस्थ भारत की तस्वीर

किसी भी राष्ट्र-राज्य के नागरिक-स्वास्थ्य को समझे बिना वहां के विकास को नहीं समझा जा सकता है। दुनिया के तमाम विकसित देश अपने नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा से चिंतनशील व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील रहे हैं। नागरिकों का बेहतर स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति को तीव्रता प्रदान करता है। इतिहास गवाह रहा है कि जिस देश के लोग ज्यादा स्वस्थ रहे हैं, वहां की उत्पादन शक्ति बेहतर रही है। और किसी भी विकासशील देश के लिए अपना उत्पदान शक्ति का सकारात्मक बनाए रखना ही उसकी विकसित देश की ओर बढ़ने की पहली शर्त है। ऐसे में भारत को पूरी तरह कैसे स्वस्थ बनाए जाए यह एक अहम् प्रश्न है। अथवा दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय नागरिकों को पूर्ण रूपेण स्वास्थ्य-सुरक्षा कैसे दी जाए आज भी एक यक्ष प्रश्न है। ऐसे में एक स्वास्थ्य चिंतक होने के नाते कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर मैं चिंतन-मनन करता रहा हूं। हमें लगता है कि सरकार इन सुझाओं पर ध्यान दें तो इस दिशा में और बेहतर परिणाम आ सकते हैं।

स्वास्थ्य ही क्यों हमारी किसान नीति भी कहां कुछ कर पा रही है। जो किसान हमें अनाज उत्पादित कर के देता है। जिसकी मेहनत से हम अपना पेट पालते हैं। उसकी मेहनत का उचित मूल्य आज तक हम नहीं दे पाएं हैं। गर हम सरकारी आंकड़ों को माने जिसके अनुसार देश में 65 फीसद किसान हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि देश के आधे से ज्यादा लोग किसानी पर निर्भर हैं। 35 फीसद लोग नौकरी, उद्योग धंधे आदि पर निर्भर हैं। 35 फीसद लोग जो उत्पाद बनाते हैं उसका ग्राहक भी उनके साथ-साथ किसान भी है। लेकिन यहां पर भी गजब की धोखाधड़ी है। किसान के उत्पाद का मूल्य सरकार तय करती है और उसके उत्पाद से उत्पादित वस्तु का मूल्य साहूकार यानी उद्योगपति तय करता है। बाजार में आज 20 रुपये में 4 किलो आलू उपलब्ध है। लेकिन आलू से बने 40 ग्राम चिप्स की कीमत आज भी 10 रुपये है। मेहनत किसान करे और डीपीएस स्कूल में पढने उद्योगपति का लड़का जाए!

गजब का यह विकास मॉडल है! इन विषयों पर बात की जाए तो लंबी बात की जा सकती हैं। मूल बात यह है कि विकास के मौजूदा मॉडल को भारतीय संदर्भ में परिभाषित किए जाने की सख्त जरूरत है। नहीं तो सोने की चिड़िया कहा जाने वाला भारत सिर्फ चिड़िया बन कर रह जायेगा, वह भी बिना हाड़ मांस के! गर 2018 में इन विषयों पर हम थोड़ा भी संजीदा गो गए तो निश्चित ही स्वस्थ भारत की दिशा में एक बेहतर कदम होगा!

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NMC-2017: स्वास्थ्य शिक्षा की बदलेगी तस्वीर…

स्वास्थ्य शिक्षा किसी भी देश के स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रुप से चलाने के लिए जरूरी घटक होता है। स्वास्थ्य व्यवस्था को गतिमान बनाने के लिए एक ऐसी विधायी व्यवस्था की जरूरत होती है जो समय के साथ-साथ कदम ताल मिलाए। यही सोचकर सरकार ने एनएमसी बिल जल्द से जल्द पास कराना चाहती है। ऐसा नहीं है कि भारत में इस बिल के पहले स्वास्थ्य शिक्षा के लिए कोई व्यवस्था नहीं रही है। 6 दशक पहले भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम,1956 के अंतर्गत मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया का गठन किया गया था। इसके ऊपर देश की चिकित्सा सेवा एवं व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानको के अनुरूप रखने की जिम्मेदारी थी। लेकिन कालांतर में यह संस्था भ्रष्टाचार के गिरफ्त में आ गई और मेडिकल कॉलेजों से ऐसे लोग पास होकर निकलने लगे, जिनकी चिकित्सकीय योग्यता कटघरे में रही। हद तो उस समय हुई जब इस संस्था का अध्यक्ष एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के बदले घुस लेने के आरोप में सीबीआई के हाथों पकड़ा गया। 23 अप्रैल, 2010 का वह दिन एमसीआई के इतिहास का काला दिन साबित हुआ। उस दिन अध्यक्ष केतन देसाई के संग-संग एमसीआई का ही एक पदाधिकारी जेपी सिंह एवं उक्त मेडिकल कॉलेज का प्रबंधक भी गिरफ्तरा हुआ। एमसीआई भ्रष्टाचार की कहानियां मीडिया में खूब सूर्खियों में रही। दूसरी ओर देश के कोने-कोने से एमसीआई को भंग करने की मांग की जाने लगी। आगे चलकर एमसीआई को भंग करना पड़ा। और आज यह कहानी आईएमसी अधिनियम-1956 की जगह एनएमसी बिल,2017 के रूप में अपने अंतिम निष्कर्ष की ओर है।

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विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, बस अड्डा सहित उन सभी जगहों पर महिलाओं के अलग से शौचालय बनें, विशेष रूप से मूत्रालय।
श्री आशुतोष ने बताया की यात्रा के दौरान देश भर की बालिकाओं ने अलग से मूत्रालय बनाये जाने की बात प्रमुखता से रखी थी। विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के पदाधिकारियों ने एक बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय किया गया की बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की मांग को जोर सोर से उठाया जायेगा। अगर सरकार इस बात पर गंभीर नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर धीप्रज्ञ द्विवेदी, शशिप्रभा तिवारी, प्रसून लतांत सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

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बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है।

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स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

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स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत पहुँच चुकी है।

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इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर

इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर
ईवा वेलफेयर ऑरगाइनेशन ने स्वस्थ भारत यात्रा का किया स्वागत
प्रेस क्लब इंदौर में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

बीमार नहीं बीमारी को दूर करने की है जरूरत : आशुतोष कुमार सिंह
16000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा अप्रैल में होगी पूरी
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने पर चल रही है यह यात्रा

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स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ समाज की परिकल्पना में बालिकाओं का स्वस्थ होना जरूरीः प्रो. बीके कुठियाला

स्वस्थ भारत के यात्रियों ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

कबीर वाणी के माध्यम से दिया गया स्वास्थ्य एवं स्वच्छता का संदेश