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क्या आप जानते हैं ! 65 साल पहले भारत में आया जापानी इंसेफलाइटिस !

आशुतोष कुमार सिंह

भारत जैसे देश किसी भी नई बीमारी का पालनहाल आसानी से बन जाते हैं। सवा अरब से ज्यादा जनसंख्या को लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे भारत में जब कोई बीमारी आयात होती है, तो उसकी खातिरदारी घर आए मेहमान की तरह की जाती है। उसके प्रति हमारा नजरिया, उसको रोकने के उपाय ठीक वैसे ही होते हैं जैसे घर आए दामाद खुद से चले जाएं तो ठीक है, नहीं तो उन्हें कौन कहे की आप अपने घर चले जाइए। ऐसी बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि बीमारियों के फलने-फूलने के लिए जरूरी खाद-पानी यहां पर भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। यहां पर नई बीमारियों की खेती करने में पूरा तंत्र सहयोग करता है। कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू एवं इबोला जैसी बीमारियों की खेती यहां पर खूब हो रही है। इनकी ब्रांडिंग कर के कुछ यहां के कुछ दूसरे मूल्कों की संस्थाएं अपनी आर्थिक स्वार्थों को पूर्ण करने में सफल भी हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ स्वस्थ मानव संसाधन की रीढ़ की हड्डी तोड़ने की कोशिश साकार होती दिख रही है।
इन सब बातों की चर्चा यहां पर इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इन दिनों एक और बीमारी की ब्रांडिंग जोरो पर है। वर्षों से इस बीमारी का जो बीज हमने बोए थे वे अब फलदायी हो गए हैं। अब पहले से ज्यादा मारक हो गई है यह बीमारी। अब मौतों की संख्या बढ़ाने में इस बीमारी ने महारत हासिल कर ली है। अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि मैं किस बीमारी की इतनी तारीफ किए जा रहा हूं। जी हां, यह बीमारी है जापानी इंसेफलाइटिस(जेई)। इस बीमारी ने भारत के कई क्षेत्रों को अपना निशाना बनाया है। और आज उसका हरेक निशाना सही लग रहा है। देश के नौनिहालों को निगलने में यह बीमारी बहुत ही सफल रही है। गोरखपुर के बीआडी अस्पताल में हो रही मौतों का सिलसिला थमा भी नहीं था कि यह झारखंड के जमशेदपुर में हाहाकार मचाने में सफल रही। बगल के रांची में भी इसने कोहराम मचा रखा है। बिहार के मुजफ्फरपुर का क्षेत्र हो अथवा गोरखपुर, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज एवं सिवान का भूगोल। इन क्षेत्रों में इंसेफलाटिस ने अपने आप को खूब फैलाया है।

लचर व्यवस्था ने ली जान

अब यहां पर सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इंसेफलाइटिस होता कैसे है? और भारत में इसने कब कदम रखा? इसकी मजबूती का राज क्या है?
उत्तर प्रदेश में इंसेफलाइटिस पर पिछले दिनों एपीपीएल ट्रस्ट ने एक अध्ययन किया था। उस अध्य्यन में कहा गया है कि यह रोग फ्लावी वायरस के कारण होता है। यह भी मच्छर जनित एक वायरल बीमारी है। जिसमें सिर में अचानक से दर्द शुरू होता है, शरीर कमजोर पड़ने लगता है। इसका लक्ष्ण भी बहुत हद तक सामान्य बुखार जैसा ही होता होता है। इसका असर शरीर के न्यूरो सिस्टम पर पड़ता है। यही कारण है कि इस बीमारी ने या तो बीमारों को मौत की नींद सुलाया है अथवा उन्हें विकलांग कर दिया है। इस बीमारी को फैलने वाले क्षेत्र के बारे मे इस शोध में कहा गया है कि धान की खेती एवं सुअर-पालन जिन क्षेत्रों में होता है, वहां पर यह बीमारी आसानी से फैलती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका फैलाव व्यक्ति से व्यक्ति के रूप में नहीं होता है। यह बात तो इस बीमारी के सिम्टम्स की हुई।

65 वर्ष पहले भारत में आई थी यह बीमारी

भारत में यह बीमारी कब आई यह जानना भी कम दिलचस्प नहीं है। आज से 65 वर्ष पूर्व यानी 1952 में पहली बार महाराष्ट्र के नागपुर परिक्षेत्र में इस बीमारी का पता चला। वहीं सन् 1955 तमिलनाडू के उत्तरी एरकोट जिला के वेल्लोर में पहली बार क्लीनीकली इसे डायग्नोस किया गया। 1955 से 1966 के बीच दक्षिण भारत में 65 मामले सामने आए। धीरे-धीरे इस बीमारी ने भारत के अन्य क्षेत्रों में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। भारत में पहली बार इस बीमारी ने 1973 फिर 1976 में पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा तबाही मचाई। पंश्चिम बंगाल के वर्दवान एवं बांकुरा जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। 1973 में बांकुरा जिला में इस रोग से पीड़ित 42.6 फीसद लोगों की मौत हुई। 1978 आते-आते यह बीमारी देश के 21 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों में फैल गयी। इसी दौरान भारत के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1002 मामले सामने आए जिसमें 297 मौतें हुई। सिर्फ यूपी की बात की जाए तो 1978 से 2005 तक यह बीमारी 10,000 से ज्यादा मौतों का कारण बनी। 2005 में जो हुआ उसने इस बीमारी की ताकत से देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को परिचित कराया। सिर्फ गोरखपुर में 6061 केस सामने आए जिसमें 1500 जानें गईं। इसी तरह 2006 में 2320 मामलों में 528 बच्चों को अपनी जान गवानी पड़ी। 2007 में 3024 मामलों में 645 मौत। इस तरह 2007 तक देश में 103389 मामले सामने आए जिसमें 33,729 रोगियों को नहीं बचाया जा सका। इस शोध में यह बात भी कही गयी है कि 597,542,000 लोग जापानी इंसेफलाइटिस प्रभावित क्षेत्र में रह रहे हैं और 1500-4000 मामले प्रत्येक वर्ष सामने आ रहे हैं। यहां पर यह भी ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक हम लोग जिन आंकड़ों की बात कर रहे हैं, वे सब रिपोर्टेड हैं। बहुत से मामले ऐसे भी होंगे जो रिपोर्ट नहीं हुए होंगे। ऐसे में जब बिना रिपोर्ट किए गए मामलों की नज़र से इस बीमारी को हम देखें तो पता चलेगा कि यह बीमारी कितनी ताकतवर हो चुकी है। नेशनल वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) जिसे पहले हमलोग राष्ट्रीय एंटी मलेरिया प्रोग्राम (एनएएमपी) के नाम से जानते थे, इन दिनों भारत में जेई के मामले को मोनिटर कर रही है। अभी तक देश के 26 राज्यों में कभी-कभार तो 12 राज्यों में अनवरत यह बीमारी अपना कहर बरपा रही है।
1951-52 में पहली बार भारत में लोकसभा चुनाव हुआ था। तब से लेकर अभी तक तमाम प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री बने और चले गए लेकिन 1952 से चली आ रही इस बीमारी का ईलाज नहीं ढ़ूढ़ पाए। लोग मरते रहे और आज भी मर रहे हैं।

146 वर्ष पहले जापान में सबसे पहले इस बीमारी का पता चला

इंसेफलाइटिस की जड़ों को अगर हम ढूढ़ें तो पता चलता है कि इसका जन्म सबसे पहले जापान में हुआ था। शायद यहीं कारण है कि इसे जापानी इंसेफलाइटिस कहा जाता है। आज से 146 वर्ष पूर्व जापान में यह बीमारी सबसे पहले पहचान में आई। 53 वर्षों के बाद इस बीमारी ने अपना विकराल रूप दिखाया और 1924 में जापान में 6000 केस पंजीकृत हुए। यहां से इसका फैलाव एशिया के देशों में हुआ। 1960 के दशक में चलाए गए टिकाकरण अभियान के कारण इस पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया गया। जापान के अलावा, कोरिया, ताइवान, सिंगापुर जैसे देशों में इसने अपना पैर पसारा फिर जैसा की ऊपर बताया जा चुका है 1952 में इसका प्रवेश भारत में हुआ।

आश्चर्य का विषय यह है कि भारत सरकार इंसेफलाइटिस के सही कारणों को जानने में अभी तक नाकाम रही है। अभी जांच का फोकस गोरखपुर बना हुआ है। जबकि इस बीमारी का फैलाव देश के लगभग प्रत्येक कोने में है। दक्षिण भारत में यह बीमारी पहले आई लेकिन वहां पर वह उतना सफल नहीं हुई जितना उत्तर भारत में दिख रही है। ऐसे में शोध का बिंदु दक्षिण भारत भी होना चाहिए। इतना ही नहीं जांच का बिंदु एशिया के तमाम देश भी होने चाहिए जहां पर यह बीमारी अपना पांव पसार चुकी है। शायद तब जाकर हम इस बीमारी के कारणों की तह में जा पाएंगे एवं ईलाज ढूढ़ पाने के नजदीक पहुंचेंगे। अभी तो ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं है कि इस बीमारी का ईलाज संभव हो सके नहीं तो गर हमारी सरकारों ने इस बीमारी की भयावहता को पहले ही भांप कर समुचित कदम उठाया होता तो बीआरडी अस्पताल में जो चीख-पुकार सुनने को मिल रही है शायद वह नहीं मिलती।

यह लेख www.firstposthindi.com से साभार लिया गया है।

विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत ने की मांग, महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर बने शौचालय!

नई दिल्ली

‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा करने वाले स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने महिलाओं के लिए सार्वजानिक जगहों पर अलग शौचालय बनाएं जाने कीय मांग की है। अपनी यात्रा के अनुभवों एवं बालिकाओं से हुई बातचीत का हवाला देते हुए श्री आशुतोष ने कहा कि देश के प्रत्येक जिला मुख्यालय, प्रखंड मुख्यालय, बस अड्डा सहित उन सभी जगहों पर महिलाओं के अलग से शौचालय बनें, विशेष रूप से मूत्रालय।

श्री आशुतोष ने बताया की यात्रा के दौरान देश भर की बालिकाओं ने अलग से मूत्रालय बनाये जाने की बात प्रमुखता से रखी थी। विश्व बालिका दिवस के अवसर पर स्वस्थ भारत (न्यास) के पदाधिकारियों ने एक बैठक की। इस बैठक में यह निर्णय किया गया की बालिकाओं के लिए अलग से शौचालय की मांग को जोर सोर से उठाया जायेगा। अगर सरकार इस बात पर गंभीर नहीं हुई तो आंदोलन किया जायेगा। इस अवसर पर धीप्रज्ञ द्विवेदी, शशिप्रभा तिवारी, प्रसून लतांत सहित दर्जनों लोग उपस्थित थे।

श्रीनगर के 18 वर्षीय युवा को ‘स्वच्छता ही सेवा’ का एम्बेसडर बनाया गया

नई दिल्ली/पीआइबी/25.9.17

श्रीनगर के युवा बिलाल डार को श्रीनगर नगर निगम का ब्रान्ड एम्बेसडर बनाया गया है। 12 वर्ष की उम्र से ही बिलाल डार ‘स्वच्छता अभियान’ में योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने मन की बात कार्यक्रम में बिलाल डार का जिक्र किया था।

प्रमुख व्यक्तियों द्वारा स्वच्छता के लिए श्रमदान कार्यक्रम के अन्तर्गत आज रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन ने गुवाहटी में श्रमदान कार्यक्रम में अपना योगदान दिया। उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री करम श्याम ने मणिपुर में स्वच्छता ही सेवा अभियान का शुभारम्भ किया। चण्डीगढ प्रशासन के अधिकारियों ने केंद्र-प्रशासन सचिवालय परिसर में आयोजित स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

भारतीय कोस्ट गार्ड ने अपने परिसर में स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा के तहत स्वच्छता अभियान चलाया और पौधे लगाए। जहाज की साफ-सफाई करते हुए कचरा एकत्र किया और फिर उसका निपटान भी किया।

‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ आम लोगों के साथ-साथ कबाड़ का व्यवसाय करने वालों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है। इसके अलावे मच्छरों, मक्खियों से फैलने वाली बिमारियों की भी रोकथाम करने में मदद मिल रही है।

 

स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

अहमदाबाद 8.2.17

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कहते हैं कि बालक-बालिकाओं में हुनर की कमी नहीं होती, जरूरत होती है उसे तराशने की, सही मार्गदर्शन की। एक बार उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वो अपनी मंजिल खुद ही बना लेती हैं। ऐसी ही एक नेत्रहीन बालिका हैं कलगी रावल। कलगी जन्मजात नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरे अपने पास फटकने नहीं दिया। 10 वीं परीक्षा डायरेक्ट दीं और 76 फीसद अंकों से उतीर्ण हुईं। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका जाकर 10000 ऑडियंस के बीच अपनी बात को रखा। रेडियो जॉकी के रूप में काम किया। सुगम्य भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने जैसी बालिकाओं की सेवा करने की ठानी है और कल्गी फाउंडेशन के जरीए यह काम कर रही हैं। गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली कलगी के इसी आत्मविश्वास ने उन्हें स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर बनाया है। भारत भ्रमण पर निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने अभियान के लिए कलगी को चुना है। इस बावत कलगी ने कहा कि उन्हें स्वस्थ भारत के इस अभियान के बारे में जानकर बहुत खुश हूं, साथ ही इसका हिस्सा बनना मेरे लिए आनंद का विषय है।

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बापुनगर के बालिकाओं ने लिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प
गुजरात के अहमदाबाद स्थित बापूनगर में स्वस्थ भारत यात्रा दल ने वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिका स्वास्थ्य की स्थिति बहुत दयनीय है. जबतक हम बालिकाओं में प्राथमिक स्तर से ही स्वास्थ्य चिंतन का बीच नहीं बो देंगे तब तक सही मायने में स्वास्थ्य धारा का प्रवाह नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य हमारा मौलिक अधिकार है। ऐसे हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना, अपने परिवार को रखना ही सही मायने में न्याय है। प्लेटो के न्याय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी स्वास्थ्य को नहीं बचायेंगे तो हम अपने, अपने परिवार एवं राष्ट्र के प्रति न्याय नहीं कर पायेंगे। भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू की गई इस यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में जाकर बालिकाओं से संवाद करने का संकल्प लिया है। इस अवसर पर वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने सुंदर गीत-संगीत प्रस्तुत किया। कलगी रावल को इस मंच से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। कॉलेज की प्रधानाचार्य किंजलबेन कथिरिया, अल्काबेन सिरोया, हिम्मतभाई, प्रफुल्ल भाई सावलिया, सामाजिक कार्यकर्ता संजय भाई बेंगानी, भूषणभाई कुलकर्णी, सत्यनारायम वैष्णव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी को यात्रा दल ने दी श्रद्धांजलि

अहमदाबाद का नाम रौशन करने वाले शहीद ऋषिकेश रामाणी की प्रतिमा पर जाकर यात्रा दल ने उन्हें सलामी दी। साथ ही उनके नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल का दौरा भी किया। शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रमाणी स्कूल को वल्लभभाई ने गोद लिया है। वल्लभभाई के प्रति वहां के छात्रों में अपार स्नेह देखने को मिला। स्वस्थ भारत के आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें अपनी पत्रिका भेंट की और यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर शहीद के पिता वल्लभभाई रमाणी एवं शहीद के नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल के प्राचार्य, रवि पटेल सहित शहर के कई लोग उपस्थित थे।

गोधरा ने भी किया स्वागत

देश के लोगों के मन में गोधरा को लेकर एक संशय की स्थिति आज भी बनी हुई है। लेकिन जिस अंदाज में गोधरा ने स्वस्थ भारत यात्रा का स्वागत किया व अतुलनीय है। गोधरा के स्थानीय पत्रकार रामजानी ए रहीम ने यात्रा दल को पंचमहल के जिला निगम अधिकारी एम.एस गडवी से मिलवाया। उनके सहयोग से यात्रा दल गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर बालिका विद्यालय में जाकर स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश दिया। इस स्कूल की बालिकाओं की परवरिश स्वस्थ तरीके से होते देख स्कूल प्रबंधन को स्वस्थ भारत की ओर से आशुतोष कुमार सिंह ने साधुवाद दिया। यात्रा दल में वरिष्ठ गांधीवादी लेखक एवं पत्रकार कुमार कृष्णनन एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार रोहिल्ला भी श्री आशुतोष के साथ हैं।

गौरतलब है कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वस्थ भारत की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकली है। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देने निकली इस टीम को गांधी स्मृति दर्शन समित, स्पंदन, नेस्टिवा, राजकमल प्रकाशन समूह, संवाद मीडिया, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर, हेल्प एंड होप, जलधारा, वर्ल्ड टीवी न्यूज, आर्यावर्त लाईव सहित कई समाजसेवी संस्थाओं एवं मीडिया मित्रो सहयोग एवं समर्थन प्राप्त है।
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नोटः यात्रा अहमदाबाद के बाद सूरत की ओर कूच कर गयी है। उसके बाद यात्रा मुंबई पहुंचेगी। संपर्क-9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

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जयपुर की दो बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

जयपुर की दो बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

जयपुर/ 1.२.17
जयपुर स्थित किड्स ओरिजिन पब्लिक स्कूल की दो छात्राओं को स्वस्थ भारत (न्यास) ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज कैम्पेन का गुडविल अम्बेसडर मनोनीत किया है. इस कैम्पेन को पूरे देश में फ़ैलाने के मकसद से निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने 2 दिवसीय जयपुर प्रवास के दौरान दिया गर्ग और नीलम शर्मा को गुडविल अम्बेसडर के लिए चुना. इन दोनों बालिकाओं को यह सम्मान स्कूल के वार्षिक उत्सव में दिया जायेगा.

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बसंतपंचमी के दिन स्वस्थ भारत यात्रा दल ने किड्स ओरिजिन स्कूल की बचियों से स्वास्थ्य चर्चा की. यात्रा दल के सदस्य एवं न्यास के चेरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि अगर उन्हें आगे बढ़ना है, खूब सफलता प्राप्त करनी है तो स्वस्थ रहना पड़ेगा. इसके लिए जरूरी है की हम साफ सफाई पर ध्यान दें. घर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर की सफाई पर भी ध्यान देना अति आवश्यक है. उन्होंने बालिकाओ एवं बालकों से कहा की वे हरसंभव दातुन से मुँह धोएं. और इसके लिए नीम का पेड़ लगाना जरुरी है. उन्होने बचों को तुलसी एवं नीम के पेड़ के फ़ायदे गिनाये और सभी को पेड़ लगाने का होम वर्क दिया. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा की सभी बचे अपने माता पिता को जाकर बताएं की बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी दवा का सेवन न करें. इस दौरान बचो ने श्री आशुतोष से खूब सवाल जवाब किये और अपनी दिनचर्या के बारे में उनको बताया. किसी ने कहा की वह 14 घंटे टीवी देखता है तो किसी ने कहा की वह 9 घंटे तक सोता है. बचो ने अपने पसंदीदा कार्टून के बारे में भी आशुतोष से बात की. श्री आशुतोष ने उन्हें समझाते हुए कहा कि बचो को महात्मा गांधी के बताये रास्ते पर चलना चाहिए. और वे जो भी कार्य करें उसे अनुशाषित तरीके से करें.

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संवाद शुरू होने के पूर्व स्कूल के शिक्षक मोहित कुमार ने यात्रा दल का परिचय बालक बालिकाओं से कराया.इस अवसर पर वरिष्ट पत्रकार एवं यात्रा दल के सदस्य कुमार कृष्णन जी, यात्री विनोद कुमार, स्कूल के निदेशक जीतेन्द्र सैनी, प्रेरणा सैनी, रुचिता शर्मा , शकुंतला कुमावत, नितिका रजावत, प्रिय अ रजावत, दीक्षा कुमावत , प्रियंका कंवर, नीतू शर्मा, किरण सैनी, रेणु जाँगिड़ सहित सैकड़ों छात्र छात्राएं उपस्थित थे.
गौरतलब है की स्वस्थ भारत (न्यास) गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत यात्रा संचालित कर रहा है. 16 हजार किमी की यह यात्रा पूरे भारत में जायेगी. भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर निकली यह यात्रा स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देते हुए आगे बढ़ रही है.
जयपुर से यह यात्रा कोटा होते हुए भोपाल पहुचेगी.
यात्री दल से 9891228151, 9811288151 पर संपर्क किया जा सकता है.
इस यात्रा को गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, सवाद मीडिया, हेल्प एंड हॉप, स्पंदन, जलधारा, आर्यावर्त, आईडया क्रेकर्स सहित कई संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है.
#SwasthBharatYatra2016_17
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स्वास्थ्य हमारा मौलिक अधिकार हैः अजय कुमार

मजरूह सुल्तानपुरी का बड़ा प्रसिद्ध शेर है कि –मै तो अकेला ही चला था ज़निबे मंजिल मगर ,लोग मिलते गए और कारवां बनता गया. सच ही है की अगर किसी कार्य का दिल से जूनून और जज्बा हो आपके मन में तो उसकी शुरुवात बिना किसी का इंतजार किये अकेले भी की जा सकती है .ऐसी ही एक मिसाल हैं आज हमारे बीच अजय कुमार जी ,जिनका सपना है की स्वास्थ्य हर नागरिक का मौलिक अधिकार बने .स्वास्थ्य जो कि हमारे अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा है ,कहा भी जाता है की अच्छे तन में ही अच्छे मन का निवास होता है लेकिन यह विडम्बना ही है कि आज तक उपेक्षित ही रहा है.यह हर्ष का विषय की अजय जी की इस मुहिम का समर्थन पक्ष –विपक्ष के लगभग 28 सांसद गण और कुछ केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा पत्र जारी करके किया जा चुका है.अजय कुमार बिहार में पटना जिले के सुदूर गाँव भगवानपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में केन्द्रीय सरकार कर्मचारी कल्याण परिषद् के संयुक्त सचिव हैं और दो बार अध्यक्ष भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बने इस दिशा में अनवरत प्रयासरत हैं. .स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बन जाएगा तो आम जन को इससे क्या लाभ होगा ? इस अभियान के उद्देश्य क्या हैं ? तथा स्वास्थ्य के अन्य पहलुओं पर एक विस्तृत बातचीत स्वतंत्र पत्रकार प्रभांशु ओझा ने की .प्रस्तुत है अजय कुमार से बातचीत के प्रमुख अंश-

स्वा्स्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की ओर अग्रसर अजय कुमार...

स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने की ओर अग्रसर अजय कुमार…

-स्वास्थ्य मौलिक अधिकार बने ,यह बात आपके मन में कब और कैसे आई?

अजय-स्वास्थ्य को लेकर मेरी चिंताएं मेरे स्कूली दिनों से ही रही हैं .वहां मैंने दूरदराज के गावों में तमाम लोगों को अकाल मृत्यु प्राप्त करते देखा है.प्रसव के लिए चारपाई के साथ दूर के अस्पताल में ले जाई जा रही महिलाओं को मैंने दम तोड़ते देखा है ,उचित समय पर इलाज़ न हो पाने के आभाव में मैंने तमाम युवाओं और बच्चों को दम तोड़ते देखा है और इन परिस्थितियों ने मुझे झकझोर कर रख दिया .केंद्र सरकार में नौकरी के बाद मैंने यह प्रयास केन्द्रीय सरकार कर्मचारी कल्याण परिषद के माध्यम से व्यापक रूप से शुरू किया .एक केन्द्रीय कर्मचारी के रूप में तो मुझे स्वास्थ्य से लेकर ज्यादातर सुविधाएँ उपलब्ध हैं लेकिन आम जन की चिंता मुझे हर पल सताती रहती है.जिस घटना ने मुझे झकझोर कर रख दिया वह ये थी की एक महिला जो दिल की गंभीर बीमारी से पीड़ित थी जब एम्स में वह इलाज के लिए गयी तो उसे 6 वर्ष बाद का समय दिया गया और आश्चर्य की बात यह है की ऐसा उस स्थिति में हुआ जबकि उसके पास तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री का पत्र भी था.

-स्वास्थ्य अगर मौलिक अधिकार बनता है तो इससे आम जन को क्या विशेष लाभ होंगे ?

अजय-इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा की कोई भी अस्पताल उसके इलाज से उसे मना नहीं कर सकेगा.जबकि अक्सर आप खबरों में देखते होंगे की गंभीर स्थिति में कोई मरीज गया और अस्पताल ने उसके इलाज से मना कर दिया जिससे की उसकी मृत्यु हो गयी,उसका इलाज किया जाता तो उसे बचाया जा सकता था .मेरा यह मानना है की राज्य के हर नागरिक की जान बेशकीमती है और सरकार द्वारा उसे हर संभव रूप से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए .अच्छा स्वास्थ्य जिस दिन हर नागरिक का मौलिक अधिकार बन गया उस दिन देश की सूरत बदलते भी देर नहीं लगेगी .स्वास्थ्य नागरिक ही स्वास्थ्य राष्ट्र का निर्माण कर सकते है.

-अब तक यह मुहिम कहाँ तक पहुंची है ?सरकार द्वारा क्या प्रतिक्रिया रही है?

यह हर्ष का विषय है कि पक्ष और विपक्ष के लगभग 28 सांसदों और कुछ केंद्रीय  मंत्रियों द्वारा इस मुद्दे को संसद में भी उठाया जा चुका है और माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा जी को भी पूरे मामले से अवगत कराया जा चुका है.मीडिया और आमजन का भी भरपूर सहयोग इस मुहिम को मिल रहा है.

-सरकार को क्या समस्या है स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने में ?

अजय-देखिए कोई इस तरह की विशेष समस्या नहीं है .स्वास्थ्य और शिक्षा तो सरकार की प्रमुखता में होने ही चाहिए.हमारे पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं इस पवित्र कार्य हेतु.हां यह जरूर है की क्यूँकी यह केंद्र के साथ ही साथ राज्य का भी विषय है यानी समवर्ती सूची का हिस्सा है तो केंद्र और राज्य सरकारों को मिलजुलकर इस मामले को गंभीरता पूर्वक आगे बढ़ाना होगा और एक दूसरे का सहयोग करना होगा.

-स्वास्थ्य अब तक जन –जन का मुद्दा क्यूँ नहीं बन पाया है ,जब की यह हमारे अस्तित्व से जुड़ा इतना जरूरी मुद्दा है ?

अजय-इसे विडम्बना ही कहेंगे की हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसा महत्वपूर्ण मुद्दा ,जो की हमारे अस्तित्व से जुड़ा हुआ है ,वह इतना उपेक्षित है .डब्ल्यू एच ओ की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक 1000 व्यक्तियों पर एक डॉक्टर होने चाहिए लेकिन यह आंकड़ा हमरे देश में लगभग 1700 है ,जो की चिंताजनक है.कायदे से तो होना यही चाहिए की जन जागरूकता इस स्तर की बढे की दूसरे गौण मुद्दों की बजाय स्वास्थ्य और पर्यावरण चुनाओं का भी मुद्दा बने ,तभी सरकारें भी इस पर गंभीर होंगी.यहाँ मेरी एक सलाह यह भी होगी की स्वास्थ्य के मुद्दे को रोजगार से भी जोड़ा जाए .गाँव-गाँव में वालंटियर्स तैयार किये जाएँ जो अस्पतालों तक एमर्जंसी की स्थिति में मरीज को तत्काल पहुंचा सकें.और इस सेवा के लिए उन्हें अपेक्षित मानदेय भी दिया जाये.

सरकार के अलावा आप आम नागरिकों को क्या सलाह देना चाहेंगे स्वास्थ्य को लेकर?

अजय-एक महत्वपूर्ण बात मै यहाँ कहना चाहूँगा की भौतिक स्वास्थ्य के साथ ही साथ हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है .आज आप देखिए की अच्छी नौकरी ,अच्छा घर होने के बावजूद इन्सान अकेलेपन का शिकार है,वह तनाव का शिकार है. गला काट प्रतिस्पर्धा के युग में वह आत्महत्या को ही आखिरी विकल्प मान लेता है.यह स्थितियां चिंताजनक हैं.इसके लिए सरकारी स्तर पर तो यह प्रयास करना चाहिए की अस्पतालों में साइकेट्रिस्ट की व्यस्था हो,विद्यालयों और महाविद्यालयों में काउंसलर्स हों.नागरिक के स्तर पर यह प्रयास होना चाहिए की वह एक तो को ही सबकुछ न समझे बल्कि परिवार से भी बातचीत करे ,उसके लिए समय निकाले.नियमित व्यायाम और योग करें .खानपान का ध्यान रखें .एक डाईट चार्ट डॉक्टर की सलाह पर तैयार करें .क्या खाना है इससे ज्यादा यह महत्वपूर्ण है की क्या नहीं खाना है. यह ध्यान रखें की स्ववास्थ्य से बढ़कर कोई धन नहीं है.आइए हम सब मिलकर इस दिशा में कदम बढाएं की स्वास्थ्य हर नागरिक का मौलिक अधिकार बने.

-बहुत बहुत आभार और शुभकामनाएँ आपको इस जरूरी अभियान के लिए

अजय-जी आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद.आशा है की आपके माध्यम से मेरी बात दूर-दराज तक पहुँच सकेगी.

सबने पूछा…इतनी लूट! मैंने कहा-हाँ!

 

  •    ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ कैंपेन रू-ब-रू हुईं कालिंदी महाविद्यालय की बालिकाएं  
Ashutosh Kumar Singh Speaking befor Kalindi Collage Students

Ashutosh Kumar Singh Speaking befor Kalindi Collage Students

किस तरह समय निकल जाता है मालूम ही नहीं चलता। दिल्ली विश्वविद्यालय से सबद्ध कालिंदी महाविद्यालय में आज बालिकाओं के बीच में युवा स्वैच्छिक सेवा विषय पर अपनी बात रखनी थी। जब कालिंदी महाविद्यालय के अंदर प्रवेश किया तो बच्चों की चहल-पहल। हंसती-खेलती बालिकाएं। एक अपनापन का अहसास से घिर गया। कॉलेज के पुराने दिन ताजे हो उठे।

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज संकल्पना से जब मैं कॉलेज की बालिकाओं को रूबरू करा रहा था, तब वे बहुत संयमित एवं गंभीरता के साथ पूरी बात को सुन रही थीं। मानो उनके मन की बात कोई कह रहा है। इस दौरान बालिकाओं को नो योर मेडिसन फिल्म, जेनरिक मेडिसिन पर आमिर खान एवं डॉ. समित शर्मा की बातचीत जब मैंने दिखाई तो वहां उपस्थित सभी बालिकाओं के जहन में एक सवाल गुंजा…इतनी लूट। जवाब में मैंने कहा-हाँ।

Kalindi Collage Student's watching Know-Your_Medicine-short-film

Kalindi Collage Student’s watching Know-Your_Medicine-short-film

तकरीबन 150 बालिकाएं होंगी। सबमें एक गजब का जोश एवं उमंग दिखा। इन्होंने स्वागत गीत गाए, गांधी के भजन सुनाएं, नाटक की प्रस्तुति की। मंच संचालन किया। वो सबकुछ जो वो कर सकती थी उन्होंने किया। कालिंदी महाविद्यालय ने मुझे अपने पुराने दिनों को याद करने और अपने सपने को बालिकाओं के बीच में साझा करने का अवसर दिया। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में गांधी के स्वास्थ्य चिंतन को आगे बढ़ाने का मौका मिला। डॉ.संगीता धाल का संयोजन कमाल था।

एक साथ जब इतना कुछ मिलता है तो मन प्रफुल्लित तो होता ही है। इस आनंद का भागीदार आप भी बनिए।

 

स्वस्थ भारत नें 9 बालिकाओं को बनाया ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एंबेसडर

स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा गुडविल एंबेसडर बनी 9 बालिकाएं, साथ में जीएसडीएस के निदेशक एवं स्वस्थ भारत की टीम

स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा गुडविल एंबेसडर बनी 9 बालिकाएं, साथ में जीएसडीएस के निदेशक एवं स्वस्थ भारत की टीम

  • जम्मू कश्मीर, मध्यप्रदेश, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, असम, मणिपुर एवं अरुणाचल प्रदेश की बालिकाओं को मिला गुडविल एंबेसडर का प्रमाण-पत्र ।

  • पूरे देश में स्वस्थ भारत बनायेगा 300 बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

  • भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर स्वस्थ भारत ने शुरू किया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज कैंपेन

  • गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, मेडिकेयर फाउंडेशन, नेस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया, जलधारा, हेल्प एंड होप, सिंपैथी, स्पंदन, गोरखा फाउंडेशन एवं राजकमल प्रकाशन समूह ने दिया समर्थन

नई  दिल्ली/  गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति में आयोजित मूल्य निर्माण शिविर में स्वस्थ भारत न्यास ने देश के सात राज्यों की 9 बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ कैंपेन का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया है। ज्ञात हो कि बालिकाओं के स्वास्थ्य को लेकर शुरू किए गए इस कैंपेन को पूरे देश में ले जाने के लिए न्यास की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकलने वाली है। गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (जीएसडीएस), नेस्टिवा अस्पताल एवं मेडिकेयर फाउंडेशन, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन सहित देश के तमाम संगठनों के सहयोग से स्वस्थ भारत (न्यास) स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ कैंपेन चला रहा है। 2016-17 में 300 बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एंबेसडर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा देश की 9 बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर का प्रमाण पत्र देते हुए जीएसडीएस के निदेशक एवं स्वस्थ भारत की टीम

जीएसडीएस के सत्याग्रह मंडप में आयोजित मूल्य निर्माण शिविर में स्वस्थ भारत (न्यास) ने हैफलांग (असम) की केहुलैमइले निरियम, मणिपुर की म्यूचैमलुइ, कारगिल (जम्मू कश्मीर) की डिसकिट डोलमा एवं फिजा बानो, भोपाल (म.प्र.) की कनुप्रिया गुप्ता एवं फाल्गुनी पुरोहित, चुनार (उ.प्र.) से प्रीति राना, वेस्ट सियांग (अरुणाचल प्रदेश) से लिगमा बागरा एवं दिल्ली से प्रेरणा तिवारी को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ’ समाज का गुडविल एंबेसडर बनाया गया है। इन 9 बालिकाओं में प्रेरणा तिवारी कथक नृत्य में पारंगत हैं, डिसकिट डोलमा एवं फिजा बानो स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति अपने क्षेत्र में आम लोगों को जागरूक कर रही हैं। कनुप्रिया गुप्ता भारत की पहली ब्रेल लिपी में छपने वाले अखबार द पीस गांग की संपादक हैं, फाल्गुनी पुरोहित अपनी आंखों से दुनिया को नहीं देख सकती हैं लेकिन अपने मधुर आवाज से दुनिया में शांति क संदेश फैला रही हैं, केहुलैमइले एवं म्यूचैमलुई नॉर्थ ईस्ट में शांति की दूत बनी हुई हैं।

गौरतलब है की स्वस्थ भारत (न्यास) पिछले 4 वर्षों से जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार काम कर रहा है। न्यास द्वारा स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत ‘नो योर मेडिसिन’, ‘जेनरिक मेडिसिन लाएं पैसा बचाएं’, कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस  एवं ‘तुलसी लगाएं रोग भगाएं’ जैसे जनकल्याणकारी कैंपेन चलाए जा रहे हैं।

स्वस्थ भारत पत्रिका का लोकार्पण

स्वस्थ भारत पत्रिका का लोकार्पण करते हुए जीएसडीएस के निदेशक्र दीपंकर श्री ज्ञान

स्वस्थ भारत पत्रिका का लोकार्पण करते हुए जीएसडीएस के निदेशक्र दीपंकर श्री ज्ञान

नई दिल्ली के जीएसडीएस स्थित सत्याग्रह मंडप में आयोजित कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा प्रकाशित स्वस्थ भारत पत्रिका के प्रवेशांक का लोकार्पण जीएसडीएस के निदेशक श्री दीपंकर श्रीज्ञान, वरिष्ठ गांधीवादी श्री बसंत जी, वेदाभ्यास कुण्डु, स्वस्थ भारत न्यास के धीप्रज्ञ द्विवेदी, ऐश्वर्या सिंह, मणि शंकर एवं पत्रिका की संपादिका शशिप्रभा तिवारी की उपस्थिति में हुआ। इस पत्रिका में ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ विषय पर देश के जानी मानी हस्तियों ने अपने लेख लिखे हैं। गोवा की राज्यपाल माननीय मृदुला सिन्हा, लोकगायिका मालिनी अवस्थी, अल्का अग्रवाल, शशिप्रभा तिवारी सहित तमाम लेखकों ने बालिकाओं के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्हें जागरूक करने पर बल दिया है। इस पत्रिका के प्रकाशन पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, खेल मंत्री विजय गोयल, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक दीपंकर श्री ज्ञान सहित तमाम हस्तियों ने अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

 

जब शासक भ्रष्ट हो जाए तो महामारी फैलती है…

 

maleriaकिसी भी राष्ट्र अथवा राज्य के विकास की जब हम बात करते हैं तो सबसे पहला सवाल यह आता है कि उस राज्य का आम आदमी कितना स्वस्थ है? अपनी उत्पादकता का कितना फीसद दे पा रहा है? लेकिन आजकल पूरे देश में स्वास्थ्य की जो तस्वीर दिख रही है वो पूरी तरह से डराने वाली है। मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू सहित तमाम तरह की बीमारियां अपना पैर पसारने में सफल हो रही हैं। एक तरफ तो हम विकास की धारा को गति देने की बात कर रहे हैं, सरकारे स्मार्ट सिटी बनाने की वकालत कर रही हैं और अरबों रूपये का बजट आवंटित किए जा रहे हैं। यहां पर अहम सवाल यह उठता है कि क्या कंक्रीट के जंगल फैला लेना ही विकास की कसौटी है या इससे इतर भी विकास के कुछ मानक हैं?

पिछले दिनों एक टीवी डिवेट में गया था। दिल्ली में बढ़ रहे डेंगू और चिकनगुनिया के मामले पर चर्चा हो रही थी। राजनीतिक दलों के नेता भी उसमें शामिल थे और चिकित्सक भी। चिकित्सक तो विषय पर बात कर रहे थे लेकिन राजनेता एक दूसरे पर आरोप लगाने के सिवाय कोई और बात करने के लिए तैयार नहीं थे। कहने का मतलब यह है कि हमारा राजनीतिक तंत्र स्वास्थ्य मसलों पर पूरी तरह से उदासीन है। देश की सरकारों के पास स्वास्थ्य चिंतन की धारा न के बराबर हैं। उनका पूरा ध्यान मरीज को ठीक करने पर रहता है, जबकि असल में ध्यान मर्ज को को खत्म करने में होना चाहिए था। मलेरिया का प्रकोप आज भी जारी है। भारत जो अपने आप को दुनिया का सबसे तेज गति से विकास के दौड़ लगाने वाला देश समझ रहा है, क्या उसके विकास की गति यही है?

झाबुआ में दो वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विषयक एक परिचर्चा में जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ. अमित सेन गुप्ता ने कहा था कि जब शासक भ्रष्ट होता है तो महामारी फैलती है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया महामारी का रूप ले चुका है, इसका सीधा सा अर्थ है कि शासक भ्रष्ट हो चुका है।

डॉ. अमित सेन गुप्ता का संबोधन
https://www.youtube.com/watch?v=NmeUp5TeqJo

ऐसे में अपने स्वास्थ्य और देश के स्वास्थ्य की रक्षा करने की जिम्मेदारी हमारी खुद की है।