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स्वस्थ भारत ने लिखा प्रधानमंत्री को पत्र, कहा जनऔषधि योजना विफल हो चुकी है


• देश के सभी दवा दुकानों को जनऔषधि केन्द्र बनाने की मांग
• देश के सभी दवा दुकानों राष्ट्रीयकृत कर जनऔषधि केन्द्र में बदलने का सुझाव

नई दिल्ली/1.11.2017

स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही स्वस्थ भारत अभियान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर देश के सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत किए जाने की मांग की है। स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने इस पत्र में प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना की विफलताओं के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि देश में 90 फीसद दवाइयां जेनरिक ही बिक रही हैं। फिर देश की तमाम दवा दुकानों पर ब्रांड के नाम पर जनता को क्यों लूटा जा रहा हैं। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि गर सरकार देश की सभी दवा दुकानों को राष्ट्रीयकृत कर दे और सभी दुकानों पर जनऔषधि दवाइयां मिलने लगे तो अलग से जनऔषधि केन्द्र खोले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि देश का दवा बाजार 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का हो गया है। महंगी दवाइयों के कारण लोग गरीबी रेखा से ऊबर नहीं पा रहे हैं ऐसे में बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना उचित नहीं है।

गौरतलब है कि हाल ही में स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज विषय को लेकर 21000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा कर के स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह दिल्ली लौटे हैं। स्वस्थ भारत अभियान के अंतर्गत स्वस्थ भारत न्यास पिछले 5 वर्षों से कई जनजागरूकता कैंपेन चला चुका है। कंट्रोल मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस, जेनरिक लाइए पैसा बचाइए, तुलसी लगाइए रोग भगाइए, नो योर मेडिसिन एवं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज सरीखे जनजागरूकता कैंपेनके माध्यम से स्वस्थ भारत टीम पूरे भारत में स्वास्थ्य चिंतन को बढावा देने के लिए काम कर रही है।

बेटियों का स्वस्थ होना स्वस्थ समाज की पहली कसौटी हैः डॉ अचला नागर

स्वस्थ भारत यात्रा दल का मुंबई में हुआ स्वागत

मुंबई की दो बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मीरा-भाइंदर एवं मालाड में हुए आयोजन

बॉलीवुड के रचनाकारों से यात्रा दल की हुई मुलाकात

प्रथम चरण में यात्रा दल ने पूरी की 2700 किमी की यात्रा, दूसरा चरण कन्याकुमारी तक
स्वस्थ भारत यात्रा के प्रथम चरण में 5 राज्यों की 29 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर

मुंबई. 12.2.17

 

यात्रा दल को मिला डॉ अचला नागर का आशीर्वाद
स्वस्थ भारत यात्रा दल ने निकाह, बागवान सहित दर्जनों फिल्म लिखने वाली वरिष्ठ लेखिका डॉ अचला नागर से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने यात्रा के लिए अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि बेटियों का स्वास्थ्य बहुत जरूरी है। वर्तमान स्थिति में बेटियों के स्वास्थ्य पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां स्वस्थ नहीं होगी तब तक स्वस्थ देश अथवा समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आज बेटियों के लिए सारे दरवाजे खुले हुए हैं, बस जरूरत है कि वे सार्थक एवं अनुशासित तरीके से आगे बढ़ें। अपनी ताकत को समझें और समाज में अपनी आवाज को बुलंद करें। ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ राष्ट्रीय यात्रा की परिकल्पना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि जबतक बेटियां सेहतमंद नहीं होंगी सेहतमंद समाज का सपना अधूरा ही रहेगा। एक घंटे तक चली बातचीत में यात्रा दल के वरिष्ठ यात्री एवं वरिष्ठ पत्रकार लतांत प्रसून ने उनके फिल्मी करियर को लेकर कई सवाल पूछे, जिसका उन्होंने सहजता से उत्तर दिया।
सरोज सुमन, डॉ. सागर एवं शेखर अस्तित्व से भी हुई मुलाकात
मुंबई प्रवास के दौरान यात्रा दल ने जाने-माने संगीतकार सरोज सुमन, गीतकार शेखर अस्तित्व एवं डॉ. सागर से मुलाकात की। सभी ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अभियान के लिए यात्रा दल को शुभकामनाएं दी। इस दौरान यात्रा दल ने कवयित्री रीता दास राम से भी मुलाकात की।

 

रत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में स्वस्थ भारत (न्यास) द्वारा शुरू हुई स्वस्थ भारत यात्रा का मुंबईकरों ने जोरदार तरीके से स्वागत किया। यात्रा दल सबसे पहले मीरा-भाइंदर के विवेकानंद किड्स स्कूल पहुंचा, जहां पर बच्चों एवं उनको अभिभावकों के बीच में स्वास्थ्य चर्चा हुई। यहां पर जलधारा एवं बेटी बचाओं बेटी पढाओं की टीम ने यात्रा दल का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा दल ने दूसरा कार्यक्रम मुंबई के मालाड (ईस्ट) में किया। इस अवसर पर मुंबई की दो बालाकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। शरन्या सिगतिया और प्रीति सुमन को इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। प्रीति सुमन जहां एक ओर निर्देशन के क्षेत्र में अपना नाम रौशन कर रही हैं वहीं उनकी गायकी के चर्चे भी चहुंओर हैं। शरन्या सिगतिया की उम्र अभी 12 वर्ष ही है लेकिन उन्होंने अपनी कक्षा में बेहतरीन परफॉमेंस दिया है। मालाड में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वस्थ भारत (न्यास) के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आज समय आ गया है कि हम अपनी सेहत को लेकर चिंतनशील हों। सेहत की चिंता हम सरकार के भरोसे नहीं छोड़ सकते हैं। सेहत से बड़ा पूंजी कुछ और नहीं है। यात्रा दल के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत जी ने कहा कि महाराष्ट्र एवं गुजरात की धरती पर माताओं एवं बहनों के प्रति समाज ज्यादा संवेदनशील है। उन्होंने निगम का चुनाव लड़ रहीं 
संगीता ज्ञानमूर्ति शर्मा से कहा कि आप जीत के बाद स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के इस संदेश को और व्यवस्थित तरीके से घर-घर ले जाएं. इस अवसर पर मालाड पूर्व के निगम पार्षद ज्ञानमूर्ति शर्मा ने दवाइयों में मची लूट के बारे में लोगों को जागरूक किया। इस अवसर पर कमलेश शाह, वरिष्ठ लेखिका अलका अग्रवाल सिगतिया, विनोद रोहिल्ला सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित थीं। महाराष्ट्र में निगम चुनाव के गहमागहमी के बीच में मालाड के स्थानीय लोगों द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य चर्चा के लिए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया।

यात्रा के प्रथम चरण में 29 बालिकाएं बनीं स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एंबेसडर
 2700 किमी की प्रथम चरण की यात्रा में यात्री दल ने स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज अभियान से 29 बालिकाओं को जोड़ा। इन्हें इस अभियान का गुडविल एंबेसडर बनाया गया। हरियाणा में 6, राजस्थान में 4, मध्यप्रदेश में 15, गुजरात में 2 एवं महाराष्ट्र में 2 बालिकाओं को गुडविल एंबेसडर बनाकर सम्मानित किया गया है। 
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा ‘भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप, वर्ल्ड टीवी न्यूज़ सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 13 फरवरी को यह यात्रा पुणे होते हुए कन्याकुमारी जायेगी। जहां पर दूसरे चरण की यात्रा समाप्त होगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
#SwasthBharatYatra #SwasthBalikaSwasthSamaj #KnowYourMedicine#SwasthBharatAbhiyan #GSDS

यात्री दल से संपर्क
9891228151, 9811288151

स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

आंख नहीं, दुनिया देखती हैं कलगी रावल
• स्वस्थ भारत ने बनाया कलगी को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर
• गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर एवं बापूनगर अहमदाबाद के वाणिज्य महाविद्यालय का यात्रा दल ने किया दौरा, बालिकाओं को दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश
• शहीद ऋषिकेश रामाणी को दी श्रंद्धांजली

अहमदाबाद 8.2.17

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कहते हैं कि बालक-बालिकाओं में हुनर की कमी नहीं होती, जरूरत होती है उसे तराशने की, सही मार्गदर्शन की। एक बार उन्हें सही मार्गदर्शन मिल जाए तो वो अपनी मंजिल खुद ही बना लेती हैं। ऐसी ही एक नेत्रहीन बालिका हैं कलगी रावल। कलगी जन्मजात नेत्रहीन हैं। बावजूद इसके उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरे अपने पास फटकने नहीं दिया। 10 वीं परीक्षा डायरेक्ट दीं और 76 फीसद अंकों से उतीर्ण हुईं। इतना ही नहीं उन्होंने अमेरिका जाकर 10000 ऑडियंस के बीच अपनी बात को रखा। रेडियो जॉकी के रूप में काम किया। सुगम्य भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपने जैसी बालिकाओं की सेवा करने की ठानी है और कल्गी फाउंडेशन के जरीए यह काम कर रही हैं। गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली कलगी के इसी आत्मविश्वास ने उन्हें स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर बनाया है। भारत भ्रमण पर निकली स्वस्थ भारत यात्रा दल ने अपने अभियान के लिए कलगी को चुना है। इस बावत कलगी ने कहा कि उन्हें स्वस्थ भारत के इस अभियान के बारे में जानकर बहुत खुश हूं, साथ ही इसका हिस्सा बनना मेरे लिए आनंद का विषय है।

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बापुनगर के बालिकाओं ने लिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के संदेश को घर-घर पहुंचाने का संकल्प
गुजरात के अहमदाबाद स्थित बापूनगर में स्वस्थ भारत यात्रा दल ने वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं को संबोधित किया। इस अवसर पर स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिका स्वास्थ्य की स्थिति बहुत दयनीय है. जबतक हम बालिकाओं में प्राथमिक स्तर से ही स्वास्थ्य चिंतन का बीच नहीं बो देंगे तब तक सही मायने में स्वास्थ्य धारा का प्रवाह नहीं हो पायेगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य हमारा मौलिक अधिकार है। ऐसे हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना, अपने परिवार को रखना ही सही मायने में न्याय है। प्लेटो के न्याय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी स्वास्थ्य को नहीं बचायेंगे तो हम अपने, अपने परिवार एवं राष्ट्र के प्रति न्याय नहीं कर पायेंगे। भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू की गई इस यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हम पूरे देश में जाकर बालिकाओं से संवाद करने का संकल्प लिया है। इस अवसर पर वाणिज्य महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने सुंदर गीत-संगीत प्रस्तुत किया। कलगी रावल को इस मंच से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर मनोनित किया गया। कॉलेज की प्रधानाचार्य किंजलबेन कथिरिया, अल्काबेन सिरोया, हिम्मतभाई, प्रफुल्ल भाई सावलिया, सामाजिक कार्यकर्ता संजय भाई बेंगानी, भूषणभाई कुलकर्णी, सत्यनारायम वैष्णव सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रामाणी को यात्रा दल ने दी श्रद्धांजलि

अहमदाबाद का नाम रौशन करने वाले शहीद ऋषिकेश रामाणी की प्रतिमा पर जाकर यात्रा दल ने उन्हें सलामी दी। साथ ही उनके नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल का दौरा भी किया। शहीद वीर मेजर ऋषिकेश रमाणी स्कूल को वल्लभभाई ने गोद लिया है। वल्लभभाई के प्रति वहां के छात्रों में अपार स्नेह देखने को मिला। स्वस्थ भारत के आशुतोष कुमार सिंह ने उन्हें अपनी पत्रिका भेंट की और यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। इस अवसर पर शहीद के पिता वल्लभभाई रमाणी एवं शहीद के नाम से चलाए जा रहे नगर निगम स्कूल के प्राचार्य, रवि पटेल सहित शहर के कई लोग उपस्थित थे।

गोधरा ने भी किया स्वागत

देश के लोगों के मन में गोधरा को लेकर एक संशय की स्थिति आज भी बनी हुई है। लेकिन जिस अंदाज में गोधरा ने स्वस्थ भारत यात्रा का स्वागत किया व अतुलनीय है। गोधरा के स्थानीय पत्रकार रामजानी ए रहीम ने यात्रा दल को पंचमहल के जिला निगम अधिकारी एम.एस गडवी से मिलवाया। उनके सहयोग से यात्रा दल गोधरा के सरस्वती विद्या मंदिर बालिका विद्यालय में जाकर स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश दिया। इस स्कूल की बालिकाओं की परवरिश स्वस्थ तरीके से होते देख स्कूल प्रबंधन को स्वस्थ भारत की ओर से आशुतोष कुमार सिंह ने साधुवाद दिया। यात्रा दल में वरिष्ठ गांधीवादी लेखक एवं पत्रकार कुमार कृष्णनन एवं सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार रोहिल्ला भी श्री आशुतोष के साथ हैं।

गौरतलब है कि भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर स्वस्थ भारत की टीम स्वस्थ भारत यात्रा पर निकली है। स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश देने निकली इस टीम को गांधी स्मृति दर्शन समित, स्पंदन, नेस्टिवा, राजकमल प्रकाशन समूह, संवाद मीडिया, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर, हेल्प एंड होप, जलधारा, वर्ल्ड टीवी न्यूज, आर्यावर्त लाईव सहित कई समाजसेवी संस्थाओं एवं मीडिया मित्रो सहयोग एवं समर्थन प्राप्त है।
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नोटः यात्रा अहमदाबाद के बाद सूरत की ओर कूच कर गयी है। उसके बाद यात्रा मुंबई पहुंचेगी। संपर्क-9891228151, 9811288151

6 छात्राओं को बनाया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गुडविल एंबेसडर

झाबुआ की 6 बालिकाएं बनी स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल एम्बेसडर

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भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गंधिस्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में निकली स्वस्थ भारत यात्रा टीम ने आज माँ त्रिपुरा कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग की बालिकाओं को स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का सन्देश दिया.
छात्राओं को संबोधित करते हुए स्वस्थ भारत न्यास के चेयरमैन आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि आपलोग नर्सिंग की छात्रा हैं, आप के ऊपर देश के स्वास्थ्य की बड़ी जिम्मेदारी हैं. सही मायने में स्वस्थ भारत की सिपाही आप ही लोग हैं. छात्राओं को उन्होंने antibaiotic के दुरूपयोग को लेकर भी जागरुक किया. साथ ही उनसे शुभ लाभ की अवधारणा पर इलाज करने का संकल्प कराया. इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक कुमार कृष्णन ने भी अपनी बात रखी.
स्वस्थ भारत यात्री दल ने कॉलेज की तीन छात्राओं को स्वस्थ भारत की ओर से स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का गूडविल अम्बेसडर मनोनीत किया.
गौरतलब है की झाबुआ प्रवास के प्रथम दिन भी उत्कृष्ट विद्यालय से तीन बालिकाओं को यात्री दल ने इस अभियान का गुड विल अम्बेसडर बनाया था. साथ ही यहां के पुलिस अधीक्षक महेश चंद जैन से मुलाकात कर यात्रा की जानकारी दी थी. उन्होंने यात्री दल को कम उम्र में बालिकाओं की हो रही शादी के प्रति भी लोगों को जागरूक करने का सुझाव दिया.

स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की गुडविल अम्बेसडर

  1. मनीषा गाडडिया
  2. साक्षी सोलंकी
  3. ऋतू निनामा
    सभी उत्कृष्ट विद्यालय, झाबुआ

4 पूजा डोहरिया
5 नेहा डावर
6 इंदूबाला खेतेडीया

कार्यक्रम की शुरुवात दीपप्रज्वलन के साथ हुआ. कार्यक्रम का सञ्चालन श्री ओम शर्मा जी ने की. इस अवसर पर यात्री दल के विनोद कुमार रोहिला, कॉलेज के प्रधानाचार्य अल्पित गांधी सहित बड़ी संख्या में बीएससी नर्सिंग की छात्राएं उपस्थित थी.

16000 हजार किमी की यह यात्रा झाबुआ से अहमदाबाद, मुम्बई होते हुए कन्याकुमारी, फिर नार्थ इष्ट होते हुए दिल्ली तक जायेगी. इस यात्रा में गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजकमल प्रकाशन समूह, नॅस्टिवा अस्पताल, संवाद मीडिया सहित कई समाजसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं.

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संपर्क
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स्वस्थ भारत यात्रा २०१६-१७ सूरत पहुचीं

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गुरुग्राम, जयपुर, कोटा, भोपाल, इंदौर, झाबुआ, अहमदाबाद के बाद स्वस्थ भारत यात्रा #SwasthBharatYatra आज सूरत  पहुँच चुकी है।  रात्रि विश्राम के बाद यहाँ कल स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज के अन्तर्गत बालिका स्वास्थ को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. यहाँ से यात्रा अपने अगले पड़ाव मुम्बई के लिए प्रस्थान करेगी।  मुम्बई में यात्रा २ दिनों तक रहेगी।  मुम्बई में यात्रा का पहला चरण पूरा होगा और द्वितीय चरण आरम्भ होगा।  वहां से यात्रा में लतांत प्रसून जी भी जुड़ जायेंगे।

यात्रा टीम दूरभाष : +९१-९८९१२२८१५१

इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर

#YatraRapat #SwasthBharatYatra
इंदौर की पांच वालिकाएं बनीं ‘स्वस्थ वालिका स्वस्थ समाज’ की गुडविल एम्बेसडर
ईवा वेलफेयर ऑरगाइनेशन ने स्वस्थ भारत यात्रा का किया स्वागत
प्रेस क्लब इंदौर में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने दिया स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज का संदेश

बीमार नहीं बीमारी को दूर करने की है जरूरत : आशुतोष कुमार सिंह
16000 किमी की स्वस्थ भारत यात्रा अप्रैल में होगी पूरी
गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के मार्गदर्शन में भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने पर चल रही है यह यात्रा
इंदौर। 5.02.17

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स्वस्थ भारत यात्रा के इंदौर पहुंचने पर इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित समारोह में ईवा ऑर्गनाइजेशन की ओर से स्वागत किया गया। आयोजित समारोह में स्वस्थ भारत यात्रा के प्रकल्पक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि बालिकाओं के सेहत के सवाल की लगातार अनदेखी हो रही है। लोगों की संवेदना को झकझोरने और सामाजिक नजरिया बदलने के मकसद से यह यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से अंग्रेजों को भगाने के लिए भारत छोड़ों आंदोलन की शुरूआत की थी उसी तरह हमारे साथियों ने देश से बीमारी को भगाने के लिए एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की परिकल्पना की है। उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य के सवाल पर लोगों का जागरूक होना जरूरी है। इस परिप्रेक्ष्य में ‘अपनी दवा को जाने’ और जेनरिक मेडिसिन को लेकर चलाये जा रहे मुहिम की विस्तार से जानकारी दी। मौजूदा समय में स्वास्थ्य नीति का ताना—वाना बीमारों को ठीक करने के ईदगिर्द घूम रही है। जबकि बीमारी खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने जीवन शैली को बदलने की चर्चा करते हुए कहा कि तुलसी, नीम जैसे हर्वल का इस्तेमाल कर हम स्वस्थ् रह सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि नीम और तुलसी के पौधे व्यापक स्तर पर लगाएं। इंदौर शहर के सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ मनोहर भंडारी ने कहा कि स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज की अवधारणा ‘स्वस्थ समाज’ की दिशा में एक सार्थक पहल है। यह समाज में बालिकाओं के प्रति बढ़ी नकारात्मकता को कम करने की दिशा में उठाया गया एक बेहतर अनुष्ठान है। इस मौके पर इंदौर प्रेस क्लब के अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने स्वस्थ भारत यात्रा की इस मुहिम को भ्ररपूर समर्थन दिया, साथ ही इंदौर की होनहार बालिकाओं को ‘स्वस्थ बालिका स्वस्थ समाज’ का गुडविल एम्बेसडर बनाए जाने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि मीडिया के पास नकारात्मक खबरों को स्थान देने की जगह तो होती है लेकिन सकारात्मक खबरों को कम जगह मिल पाती है। ऐसे में जरूरत है आशुतोष एवं इनकी टीम के जैसे किए जा रहे सार्थक कार्यों को मीडिया में भरपूर जगह मिले। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार कुमार कृष्णन ने कहा कि गांधी का चिंतन लोगों तक ले जाना और बालिकाओं के प्रति उनके स्वास्थ्य के नजरिये को प्रसारित करना गांधी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ईवा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की ओर से आशुतोष कुमार सिंह, कुमार कृष्ण्न् और विनोद रोहिल्ला को सम्मानित किया गया। ईवा वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक अध्यक्ष भारती मांडोले ने कहा कि बालिका किसी से पीछे नहीं है। उन्होंने इस यात्रा के मुहिम की सराहना की और कहा यह गर्व का विषय है कि हमें इंदौर में स्वागत करने का अवसर मिला।

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शहर की पांच बालिकाएं बनी गुडविल एंबेसडर, वृसाली टिकलकर बनीं उनकी संरक्षक
प्रेस क्लब इंदौर में आयोजित इस समारोह में इंदौर शहर की पांच बालिकाओं को वृसाली टिकलकर साहू के संरक्षण में गुडविल एम्बेसडर बनाया गया। सात सालों से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर पांच हजार वालिकाओं को प्रशिक्षित करनेवाली दलजीत कौर, नेत्रहीन एवं मूक वधिर को आत्म रक्षा का गुड़ सिखाने वाली रानी हनोतिया, सेवाभावी वैदेही व्यास, थ्रो वॉल में राष्ट्रीय स्तर नाम कमा चुकी सपना कुलकर्णी एवं गीत संगीत के साथ— साथ स्वास्थ की दुनिया में नाम कमाने वाली डॉ अश्विनी राठौर को स्वस्थ भारत (न्यास) की ओर से गुडविल एम्बेसडर मनोनित किया गया।
खुशी के आंसू

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समारोह में सम्मान पाकर दलजीर कौर और रानी हनोतिया इतनी भावुक हो गयी कि उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इनके संबोधन के एक एक शब्द इतने भावपूर्ण थे कि सभी की आंखे गिली हुए बिना नहीं रह सकी। इस अवसर पर डॉ. अश्विनी राठौर से संगीत के माध्यम से बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
देवास के झुग्गी बस्ती में पहुंची स्वस्थ भारत यात्रा
यात्रा टीम 5 फरवरी की सुबह भोपाल से चलकर इंदौर पहुंची। इस दौरान रास्ते में देवास के झुग्गी झोपड़ी के बच्चों के बीच समय बिताया। टीम को स्थानीय लोगों ने बताया कि स्वच्छता के नाम पर सरकारी पैसे तो खूब आएं हैं लेकिन शौचालय के नाम पर इन्हें आज भी चार सौ मीटर दूर जाकर सार्वजनिक शौचालय की अस्वच्छ व्यवस्था में मल त्याग करना पड़ता है। इस स्थिति पर यात्री दल ने हैरानी जतायी और स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया कि उनकी बात सरकार तक पहुंचायी जाएगी। हालांकि इस बीच एक महिला के वक्तव्य ने सबका ध्यान आकृष्ट किया जिसमें उसने कहा कि झुग्गी में गंदगी नहीं मिलेगी तो और क्या मिलेगी?
कल यात्रा पहुंचेगी झाबुआ
गौरतलब है कि स्वस्थ भारत यात्रा भारत छोड़ो आंदोलन के 75 वें वर्षगांठ पर आरंभ किया गया है। नंई दिल्ली में मुख्तार अब्बास नकवी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा को गांधी स्मृति एंव दर्शन समिति, संवाद मीडिया, राजकमल प्रकाशन समूह, नेस्टिवा अस्पताल, मेडिकेयर अस्पताल, स्पंदन, जलधारा, हेल्प एंड होप सहित अन्य कई गैरसरकारी संस्थाओं का समर्थन है। 6 फरवरी को यह झाबुआ में रहेगी। 16000 किमी की जनसंदेशात्मक यह यात्रा अप्रैल में समाप्त होगी।
#SwasthBharatYatra #SwasthBalikaSwasthSamaj #KnowYourMedicine#SwasthBharatAbhiyan #GSDS

यात्री दल से संपर्क
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क्षय रोग, मलेरिया और एचआईवी एड्स के सहस्राब्दि विकास लक्ष्य हासिल- कुलस्ते

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्‍यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्‍ते ने कहा है कि राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने निर्धारित स्‍वास्‍थ्‍य लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर सकें।

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श्री कुलस्ते ने हाल ही में राज्‍यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि वैसे तो स्‍वास्‍थ्‍य राज्‍य का विषय है लेकिन इस मिशन के लागू होने के बाद से राज्यों को केंद्र द्वारा सहायता दी जा रही है. उन्होने बताया कि यह मिशन लागू होने के बाद मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर आदि में कमी आई है। इसके साथ ही, इस मिशन के जरिए क्षय रोग, मलेरिया और एचआईवी एड्स के सम्बंध में सहस्राब्दि विकास लक्ष्य भी हासिल किये जा चुके हैं।    

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एनएचएम के कार्यान्वयन के लिए बना फ्रेमवर्क इसे पूर्ण रूप से सफल करने के लिए निजी सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी का भी प्रावधान करता है जिससे जरूरतमंद को समय पर उचित इलाज मिल सके। राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य बीमा योजना के तहत प्रतिवर्ष प्रति बीपीएल कार्ड धारक परिवार का लाभार्थी चयनित अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में 30000 रूपये तक की चिकित्सा सुविधाए बिना भुगतान के प्राप्‍त कर सकते हैं। इसके साथ ही इस योजना के तहत सम्वेदनशील समूह की ग्‍यारह अन्‍य श्रेणियों के लिए कुछ निजी अस्‍पताल भी पैनल में शामिल किए गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

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स्वास्थ्य क्षेत्र में परवान चढ़ती उम्मीदें

——-प्रभांशु ओझा 

यह बात निर्विवाद है कि भारत में आजादी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर उचित ध्यान नहीं दिया गया. यही कारण है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियां साल दर साल बीतने के बाद बढ़ती ही चली गयी हैं. वर्तमान सरकार जिन वैश्विक हालातों में सत्ता में आयी, उसमें नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराना सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दा ही नहीं था, बल्कि इसके लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से भारत पर दबाव भी था. संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों पर भारत ने इस प्रतिबद्धता के साथ हस्ताक्षर भी किये हैं कि भारत नागरिकों को ‘यूनिवर्सल हेल्थ केयर’ देने की दिशा में हो रही वैश्विक प्रगति के अनुरूप प्रयास करेगा. जाहिर था कि वर्तमान केंद्र सरकार के लिये यह कठिन चुनौती थी. लेकिन अब तक के कार्यकाल में किये गये प्रयासों से यह समझना मुश्किल नहीं है कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र की हालत सुधारने के लिये गंभीरता से प्रयासरत है. उसने न सिर्फ इस दौरान महत्वपूर्ण योजनायें आरम्भ की हैं, बल्कि स्वास्थ्य स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे और बदलती जरूरतों को समझने का भी माद्दा दिखाया है.     

नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार इस बात की वकालत की है कि सरकार का आदर्श लक्ष्य सभी नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करना है. इस प्रतिबद्धता के अनुरूप ही सरकार ने तकनीकी तौर पर नेशनल हेल्थ एश्योरेंस मिशन के तहत नागरिकों को यूनिवर्सल हेल्थ केयर प्रदान करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य स्वीकार किया. हालांकि इसका नीतिगत रूप अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन उम्मीद की जा रही कि भारत जल्द ही इसको स्पष्ट करते हुये लागू कर देगा. स्पष्ट है कि केंद्र सरकार अब तक सभी नागरिकों को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराने की अपनी प्रतिबद्धता से मुकरी नहीं है.

मिशन कायाकल्‍प की शुरूआत

कायाकल्प सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक अहम पहल है. इस पहल को सार्वजनिक सुविधाओं में स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभ किया गया है। पहल के तहत  सार्वजनिक   स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं का मूल्‍यांकन किया जाएगा और ऐसी सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं जो स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण के नवाचारों के असाधारण प्रदर्शन वाले मानदंडों को प्राप्‍त करेंगी उन्‍हें पुरस्‍कार और सराहना प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्‍त सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य  सुविधाओं में  स्‍वच्‍छता, सफाई एवं संक्रमण नियंत्रण प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए स्‍वच्‍छता दिशा-निर्देश 15 मई 2015 को जारी किये गये थे। ये दिशानिर्देश सार्वजनिक स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में स्‍वच्‍छता को लेकर योजना निर्माण, बारंबारता, पद्धतियों , निगरानी आदि पर विस्‍तार से जानकारी मुहैया कराते हैं।

किलकारी एवं मोबाईल अकादमी

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गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों के माता-पिता और क्षेत्र कार्यकर्ताओं के बीच नवजात देखभाल(एएनसी),  संस्‍थागत प्रसव, नवजात पश्‍चात देखभाल (पीएनसी) एवं प्रतिरोधन के महत्‍व के बारे में उचित जागरूकता सृजित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से देशभर में किलकारी एवं मोबाईल अकादमी सेवाएं क्रियान्‍वित  करने का फैसला किया गया है। पहले चरण में 6 राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, उत्‍तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्‍था न (एचपीडी) और मध्‍य प्रदेश में किलकारी प्रारंभ की जाएगी। चार राज्‍यों उत्‍तराखंड, झारखंड, राजस्‍थान एवं मध्‍य प्रदेश में मोबाईल अकादमी की शुरूआत की जाएगी।

किलकारी एक इंटरएक्टिव वॉइस रिस्‍पोन्‍स (आईवीआर) आधारित मोबाईल सेवा है, जो सीधे गर्भवती महिलाओं, बच्‍चों की माताओं एवं उनके परिवारों के मोबाईल फोन पर गर्भावस्‍था एवं शिशु स्‍वास्‍थ्‍य  के बारे में टाईम- सेन्‍सिटीव ऑडियो मैसेज (वॉइस कॉल) भेजती है।

राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला- दक्ष

स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के कौशल में सुधार लाने के लिए गुणवत्ता वाली  सेवाएं (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल एवं किशोर स्वास्थ्य) प्रदान करने के लिए केंद्र  सरकार ने लिवरपूल ट्रॉपिकल मेडिसिन (एलएसटीएम) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र  में पांच राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशाला “दक्ष” की स्थापना कर एक बड़ा कदम उठाया। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सुविधाओं में कुशल कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, सेवा पूर्व प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना और सतत नर्सिंग शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराना है। राष्ट्रीय कौशल प्रयोगशालाओं  को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ा जा रहा है। 30 स्टैंड- अलोन कौशल प्रयोगशालाओं को गुजरात, हरियाणा , बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल,ओडिशा, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे अलग-अलग राज्यों में स्थापित किया गया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि केंद्र सरकार की यह पहल महिलाओं का जीवन बचाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है.

तम्बाकू उत्पादों पर सख्ती

केंद्र सरकार ने जब तम्बाकू उत्पादों के 85 फीसदी हिस्से पर चित्रित चेतावनियां छापने को अनिवार्य किया तो उम्मीद की जा रही थी कि देश का तम्बाकू कारोबार सरकार पर निर्णय बदलने का दबाव बनायेगा. लेकिन केंद्र सरकार ने इस फैसले पर कायम रहते हुये समाज और देश के नागरिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी. केंद्र सरकार का यह फैसला स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा सबसे साहसी था. यह गौर तलब है कि सरकार के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय ने भी मुहर लगायी. कुछ दिनों पहले अपने निर्णय में न्यायालय ने कहा कि सिगरेट निर्माता कंपनियों को केंद्र सरकार की अधिसूचना के तहत सिगरेट पैकेट के 85 फीसदी हिस्‍से पर वैधानिक चेतावनी देनी ही होगी। स्पष्ट है कि तम्बाकू उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की समाज की तरफ कुछ जिम्मेदारी भी है। जितना ज्यादा तम्बाकू उत्पाद के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को प्रचारित किया जाएगा उतना ही ज्यादा भारतीयों के जीवन को बचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति- एक क्रांतिकारी कदम

केंद्र सरकार ने सत्ता में आने के बाद एक महत्वपूर्ण पहल देश की पहली  राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति पेश कर की. नीति का उद्देश्य सभी स्तरों पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समझ बढ़ाना तथा मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व को सुदृढ़ करके मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को व्यापक स्तर पर ले जाना था। वर्तमान में भारत में सिर्फ समाज के उच्च वर्ग में ही मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता है, लेकिन इस नीति से पहली बात देश में निर्धन तबकों को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाया जा सकेगा.

यह गौर करने वाली बात है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों की देखभाल के लिए बनाए गए पूर्व कानून जैसे भारतीय पागलखाना अधिनियम, 1858 और भारतीय पागलपन अधिनियम, 1912 में मानवाधिकार के पहलू की उपेक्षा की गई थी और केवल पागलखाने में भर्ती म‍रीजों पर ही विचार किया गया था। आजादी के बाद भारत में इस संबंध में पहला कानून बनाने में 31 वर्ष का समय लगा और उसके 9 वर्ष के उपरांत मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य अधिनियम, 1987 अस्तित्‍व में आया। परंतु इस अधिनियम में कई खामियां होने के कारण इसे कभी भी किसी राज्‍य एवं केंद्र शासित प्रदेश में लागू नहीं किया गया। जाहिर है कि भारत में नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने के लिये एक नीति की आवश्यकता लगातार बनी हुयी थी.

नये मेडिकल संस्थानों की पहल

भारत में अच्छी गुणवत्ता और सेवाओं वाले मेडिकल संस्थानों की कमी एक बड़ी समस्या है. केंद्र सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिये उल्लेखनीय प्रयास किये हैं. इसके लिये केंद्र सरकार ने भारत के कुछ चुनिंदा जिला स्वास्थ्य केन्द्रों को केंद्र मेडिकल कालेज में परिवर्तित करने की योजना बनायी है। इसे चिकित्सा क्षेत्र में रोजगार तथा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा सकता है। भारत के कुल 671 जिलों में से 58 जिलों में, जिनमे अभी तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है , सर्वप्रथम उन जिला सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों को मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित करने की योजना है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों में MBBS की कम से कम 100 सीटें होंगी। सरकार ने अपने कार्यकाल में 150 जिला अस्पतालों को परिवर्तित करने का लक्ष्य बनाया है।

जानकारों की मानें तो भारत में एक मेडिकल कॉलेज बनाने पर लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत आती है। सरकार ने इस लागत का 25 प्रतिशत राज्य सरकारों के हिस्से में तय किया है। पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में लागत की 15 प्रतिशत हिस्सेदारी राज्य सरकारों की होगी, बाकि बचे 85 प्रतिशत केंद्र द्वारा मुहैय्या कराए जाएंगे। इस योजना के पहले चरण में 22 जिला अस्पतालों को मंजूरी मिल चुकी है तथा पहली किश्त के तौर पे 144 करोड़ रूपए भी जारी कर दिए गए हैं. संकेत हैं कि संसाधन कम होने पर यह योजना PPP मॉडल के अनुसार भी लागू हो सकती है। उस स्थिति में मेडिकल कॉलेज में निवेश निजी क्षेत्र करेगा। केंद्र सरकार की इस योजना से समाज के एक बड़े समूह को सुविधायें मुहैया करायी जा सकेंगी.

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी अन्य उपलब्धियां और चुनौतियां

वास्तव में केंद्र सरकार ने अपने अब तक के कार्यकाल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. सरकार द्वारा इबोला और जीका वायरस से निपटने के प्रयासों को भी देश में हर तरफ से प्रशंसा मिली है. बावजूद इसके स्वास्थ्य क्षेत्र में चुनौतियां अब भी बरक़रार हैं. सबसे बड़ी चुनौती है स्वास्थ्य पर खर्च होने वाले बजट 1.04 ( सकल घरेलू उत्पाद)  को बढ़ाना और उसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी तय करना. भारत पर अब अपने स्वास्थ्य ढांचे को दुरुस्त करने का वैश्विक दबाव भी है. उम्मीद की जा सकती है कि केंद्र सरकार इन चुनौतियों से सही योजना और नजरिये से निपटेगी.

नसबंदी कांड को रफा दफा करने में जुटी है रमन सरकारःराहुल गांधी

नसबंदी मामले पर राजनीति रंग जितना कम चढेगा, न्याय मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। आज राहुल गांधी का बिलासपुर पहुंचना अच्छी बात है, लेकिन हमें इस बात की शंका है कि  कहीं यह मामला राजनीति की भेंट न चढ़ जाएं। आजादी के बाद का भारतीय राजनीतिक इतिहास यही कहता है कि यदि किसी मसले  की कब्र खोदनी हो तो उसे राजनीतिक जामा पहना दीजिए।  स्वस्थ भारत अभियान बार-बार इस बात को दुहरा रहा है कि इस मसले को राजनीति से ऊपर उठकर हल करने की जरूरत है। संपादक 

बिलासपुर में नशबंदी पीड़ितों के परिजनों से मिलते राहुल गांधी

बिलासपुर में नशबंदी पीड़ितों के परिजनों से मिलते राहुल गांधी

बिलासपुर। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज यहां नसबंदी कांड के पीड़ितों से मुलाकात करने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार पर मामले को रफादफा करने के प्रयास का आरोप लगाया और कहा कि इस हादसे में भ्रष्टाचार की भूमिका है।
पीड़ित परिवारों से उनके गांवों में मुलाकात करने और अस्पताल का दौरा करने के बाद राहुल ने इस त्रासदी की जिम्मेदारी न लेने के लिए रमन सिंह सरकार की आलोचना की और एक व्यापक जांच की मांग की। कांग्रेस नेता ने कहा कि शिविर उचित ठंग से नहीं चल रहा था और अनेक लोगों को नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार जिम्मेदारी नहीं ले रही है और बदले में दवाओं को जलाया जा रहा है और मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल गांधी ने उन पीड़ित परिवारों से मुलाकात की जिनके परिजन मौत के शिकार हुए है और अस्पताल का दौरा किया जहां प्रभावित महिलाओं का इलाज चल रहा है।  उन्होंने कहा, पहली चीज तो यह कि मुझे पता लगाना होगा कि क्या हुआ। निश्चित रूप से कहीं कुछ गड़बड़ थी। सरकार जिम्मेदार है और स्वास्थ्य मंत्री (जिम्मेदार हैं)। उन्होंने साथ ही कहा, मुझे बहुत दुख है। जब एक मां को पीड़ा होती है तो पूरा परिवार पीड़ा झेलता है।

बिलासपुर के अस्पताल में मरीजों का हाल सुनते राहुल गांधी

बिलासपुर के अस्पताल में मरीजों का हाल सुनते राहुल गांधी

 

महिलाओं की मौत के पीछे के कारणों के सम्बन्ध में राहुल ने कहा कि सबसे पहले तो यह पता लगाना चाहिए कि वास्तव में क्या हुआ था। यह तो तय है कि स्वास्थ्य शिविरों का संचालन ठीक तरीके से नहीं किया गया है। उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। इससे पहले राहुल गांधी ने बिलासपुर के निकट अमसेना गांव में नसबंदी मामले में दम तोड़ चुकी महिला फूलबाई के पति रूप चंद और अन्य प्रभावितों के परिजनों से मुलाकात की।  गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के गृह नगर बिलासपुर से 10 किलोमीटर दूर तखतपुर ब्लाक के एक अस्पताल में आठ नवम्बर को आयोजित परिवार कल्याण शिविर में 83 महिलाओं की नसबंदी के आपरेशन किए गए थे जिसमें 12 महिलाओं की मौत हुई है। इसके दो दिन बाद 10 नवम्बर को पेंड्रा ब्लॉक में हुए 56 आॅपरेशनों में एक बैगा आदिवासी महिला की मौत हो गई। अभी बिलासपुर के अपोलो और सिम्स अस्पताल में नसबंदी मामले में अस्वस्थ हुई 122 महिलाएं भर्ती है। राज्य सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं इस मामले में एक चिकित्सक और दवा कंपनी के मालिक तथा उसके बेटे को गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के इस्तीफे की मांग की है।  हालांकि, अग्रवाल ने इस मांग को नकारते हुए कहा, ‘‘जब भी कोई घटना होती है, इस संबंध में जिम्मेदारी सरकार की होती है…मैं इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं। इस्तीफे का कोई सवाल नहीं है। मैं निर्णय नहीं लेता। इस संबंध में निर्णय पार्टी करेगी।

साभारःhttp://www.hellocg.com/ साथ में  स्वस्थ भारत अभियान टीम

मर्ज का ईलाज करेगा ‘ऋषि‍केश-एम्स’

newlogo_aiims rishikeshAshutosh Kumar Singh for Swasthbharat.in

 

भारत की स्वास्थ्य नीति हमेशा से बीमारों को ठीक करने के इर्द-गीर्द रही है। नई सरकार ने पहली बार बीमारी को ठीक करने की दिशा में सकारात्मक पहल की है। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान (एम्‍स) ऋषि‍केश देश का पहला नागरि‍क-स्‍वास्‍थ केन्द्र होगा, जो उपचार की अपेक्षा नि‍रोधात्‍मक पद्धति‍ पर केन्‍द्रि‍त होगा। एम्स, ऋषि‍केश का प्रयास होगा कि ‍यह लोगों का नि‍रोधात्‍मक स्‍थि‍ति‍ में उपचार करे। एम्‍स-ऋषि‍केश में मीडिया को सम्‍बोधि‍त करते हुए केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा-  ‘जब लोग पहाड़ों पर बीमार पडते है, तो अस्‍पताल तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी समस्‍या होती है। प्राय: बीमारी इतनी गम्‍भीर नही होती, किंतु अस्‍पताल तक आते-आते मरीज की हालत बि‍गड़ जाती है। इस समस्‍या को हल करने के लि‍ए मैंने एम्‍स के अधि‍कारि‍यों को निर्देशि‍त कि‍या है कि‍ वे मरीजों का एक डाटा बैंक तैयार करें तथा ई-मेल और मोबाईल के जरि‍ए उनसे संवाद कायम करने की प्रणाली काम में लाए।’

स्‍वास्‍थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि‍ लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचे, यह उनकी कार्ययोजना में प्रमुखता से शामिल है। एम्‍स ऋषि‍केश को एक पाइलट परि‍योजना के रूप में पूरा करने का गौरव प्रदान हुआ है। एम्स ऋषि‍केश का पंजीकरण पटल मूलभूत डाटा का स्रोत होगा। इसमें आने वाले प्रत्‍येक रोगी का ई-मेल अथवा मोबाइल नम्‍बर कम्‍प्‍यूटर में दर्ज कि‍या जाएगा। नि‍रन्‍तर अन्‍तराल पर ई-मेल अथवा संदेश के जरि‍ए अस्‍पताल संवाद कायम करेगा। रोगी को नि‍यमि‍त अंतराल पर स्‍वास्‍थ्‍य जांच शि‍वि‍‍रों के बारे में अग्रि‍म रूप से भी सूचि‍त कि‍या जाएगा। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने बताया कि‍ सम्‍पर्क में रहने की यह पहल पारस्परिक आधार पर रहेगी।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि‍, ‘ईलाज से परहेज बेहतर है’ का सि‍द्धान्‍त सरकार की स्‍वास्‍थ्‍य नीति‍ का केन्‍द्र बि‍न्‍दु है। प्रत्‍येक चि‍कि‍त्‍सक को बताया जाएगा कि ‍वे रोगि‍यों को समुचि‍त जीवन शैली अपनाने के लि‍ए प्रेरि‍त करें,जि‍ससे मरीजों का आना जरूरी न हो। मैंने एम्‍स के सभी ओ.पी.डी. स्‍टाफ को भी निर्देशि‍त कि‍या है कि ‍वे सम्‍बंधि‍त वि‍भाग के कार्यक्रमों के बारे में सूचनाओं को लगातार प्रदर्शि‍त करें। इस प्रकार ईलाज का इन्‍तजार कर रहे मरीजों व उनके रि‍श्‍तेदारों को रोग के बारे में गहरी जानकारी मि‍लेगी, जि‍सके चलते मरीज अस्‍पताल में आया और रोग की रोकथाम कैसे हो, इसका भी उन्‍हें पता चल सकेगा।’
डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‘मैंने इस एम्‍स के वि‍स्‍तार के लि‍ए पहले ही योजनायें तैयार की हुई है और यह केन्‍द्र मेरे दि‍ल में बसा है, क्‍योंकि‍ ये एम्‍स ऐसे क्षेत्र के लोगों की सेवा में लगा है, जो हमारे राष्‍ट्र की आध्‍यात्‍मि‍क रीढ़ हैं।’

क्या है योजना
• हॉलि‍स्‍टि‍क मेडीसिन में 100 बेड वाला सर्वोत्‍तम केन्‍द्र। यहां मरीजों का ऐलोपैथि‍क पद्धति‍ के साथ-साथ आयुर्वेद, योग तथा अन्‍य भारतीय चि‍कि‍त्‍सा पद्धति‍यों से भी उपचार होगा।

  • चि‍कि‍त्‍सा के क्षेत्र में वि‍ख्‍यात अमरीकी अथवा फ्रांस के सहयोग से एक अन्‍तर्राष्‍ट्रीय लोक स्‍वास्‍थ्‍य वि‍द्यालय की स्‍थापना (घोषणा बाद में की जाएगी)।
  • ऑनकोलॉजी, न्‍यूरोसर्जरी, नेफ्ररोलॉजी, कार्डि‍यक थोरासि‍स एवं वस्कुलर सर्जरी के लि‍ए उत्‍कृष्‍ट उपचार केंद्र होगा।
  • 120सीटों से युक्‍त भारत का पहला नर्सिंग शि‍क्षा में सर्वोत्तम प्रशिक्षण केंद्र अगले वर्ष तक शुरू हो जाएगा और यह पुरूष छात्रों के दाखि‍ले के लि‍ए पहला एम्‍स नर्सिंग कॉलेज होगा
  • जि‍रीयट्रि‍क मेडीसीन एवं ऑक्‍यूपेशनल व पर्यावरण स्‍वास्‍थ्‍य के लि‍ए नए वि‍भाग
    एम्स ऋषिकेश का विस्तार
    एम्‍स, ऋषि‍केश में एक नवनिर्मि‍त ब्‍लड बैंक के उद्द्याटन के उपरान्‍त, डॉ. हर्षवर्धन ने घोषणा की कि‍ उत्‍तराखंड सरकार के साथ यह बात चल रही है कि‍ अति‍रिक्‍त 100 एकड़ भूमि ‍पर एम्‍स, ऋषि‍केश की सुवि‍धाओं का वि‍स्‍तार कि‍या जाए तथा चि‍कि‍त्‍सीय जड़ी बुटी की खेती के लि‍ए अति‍रि‍क्‍त भूमि ‍की आवश्‍यकता है, जो हॉलि‍स्‍टि‍क स्‍वास्‍थ लाभ के लि‍ए औषधि‍यों के निर्माण के लि‍ए उपयोग में लाई जाएगी।
    इस बावत उन्‍होंने यह भी बताया कि‍ एम्‍स – ऋषि‍केश के नि‍देशक को शक्‍ति‍यां प्रदत्‍त कर दी गई है कि ‍वे मंत्रालय को सन्‍दर्भि‍त कि‍ए बगैर ही अपने स्‍तर पर संकाय सदस्‍य, अधि‍कारि‍यों तथा अन्‍य स्‍टाफ की भर्ती कर सकते हैं। उन्‍हें उपकरणों की खरीद तथा नव निर्माण कार्य कराने के लि‍ए भी वित्तीय शक्‍ति‍यां प्राप्‍त होगी। डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि, ‍एम्‍स-ऋषि‍केश का पूर्ण निर्माण सुनि‍श्‍चि‍त करने के लि‍ए मैंने सभी कठि‍नाईयों को समाप्‍त कर दि‍या है, जो मैंने इस वर्ष 25 दि‍सम्‍बर तक पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बि‍हारी वाजपेई के जन्‍म दि‍वस पर पूरा करने का वायदा कि‍या था।
    डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि‍, ‘मैं उत्‍तराखंड में स्‍वास्‍थ्‍य के लि‍ए आधारभूत संरचना में सुधार हेतु वचनबद्ध हूँ और सरकार एवं यहां उपस्‍थि‍त लोगों को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि‍ मेरा मंत्रालय स्‍वास्‍थ के मानकों मे सुधार के लि‍ए सभी आवश्‍यक संसाधन जुटाने के लि‍ए तत्‍पर है।’

 नोटः यह खबर अगस्त, 2014 की है…लेकिन इस खबर को मुख्यधारा की मीडिया में वह स्थान नहीं मिल पायी थी जो मिलनी चाहिए थी…

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