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 विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर विशेष: माहवारी है ईश्वर की सौगात , इस पर करें हम खुलकर बात

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट आई है जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में आज भी 62 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। इस सर्वे में 15 से 24 आयु वर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया था। कई राज्यों में तो 80 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। 2015-16 सर्वे में खुलासा हुआ कि देश में महिलाएं आज भी पीरियड्स के लिए कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। बिहार में 82 प्रतिशत महिलाएं जहां कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। इन दोनों प्रदेशों में 81 प्रतिशत महिलाएं कपड़ा इस्तेमाल करती हैं। सर्वे ने पाया कि 42 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करतीहैं। वहीं 16 प्रतिशत महिलाएं लोकल तौर पर बनाए गए नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं।

 
लोकनाथ त्रिवेदी की रपट
बहराइच/ यूपी :  आज विश्व मासिक धर्म दिवस है, जी हां, साल 2014 से 28 मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में फैली मासिक धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा को दूर करना और महिलाओं और किशोरियों को महावारी प्रबंधन सम्बन्धी सही जानकारी देना है। देश में इस वक्त मेंस्ट्रुएशन और सैनिटरी नैपकीन्स को लेकर बड़ी बहस चल रही है। इसी बीच नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट आई है जिसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं। देश में आज भी 62 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। इस सर्वे में 15 से 24 आयु वर्ग की महिलाओं को शामिल किया गया था। कई राज्यों में तो 80 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। 2015-16 सर्वे में खुलासा हुआ कि देश में महिलाएं आज भी पीरियड्स के लिए कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। बिहार में 82 प्रतिशत महिलाएं जहां कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। इन दोनों प्रदेशों में 81 प्रतिशत महिलाएं कपड़ा इस्तेमाल करती हैं। सर्वे ने पाया कि 42 प्रतिशत महिलाएं सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करतीहैं। वहीं 16 प्रतिशत महिलाएं लोकल तौर पर बनाए गए नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं।
 
माहवारी पर लोग खुल कर बात करें इसलिए प्रतिवर्ष २८ मई को विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है ,कई तरह के जागरूकता अभियान तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं सरकार इस पर करोड़ों रुपए का बजट खर्च कर रही है । इसके बावजूद भी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के सर्वे की मानें तो 50 प्रतिशत किशोरियों को अपनी पहली माहवारी के बारे में जानकारी नहीं होती है और 80% किशोरियों को इस दौरान धार्मिक स्थलों पर जाने की मनाही होती है ।
21वी सदी में भी नहीं सुधर पायी ही स्थिति
आजादी के 70 वर्ष बाद भी हमारे समाज में किशोरियों एवं महिलाएं पुरानी धार्मिक कुप्रथा की जंजीरों में जकड़ी तमाम संक्रमित बीमारियों से घिरी कुंठाग्रस्त जीवन जीने को मजबूर हैं । जब महिलाएं इन मान्यताओं को धार्मिक ज्ञान मान लेती हैं और माहवारी की शर्मिंदगी को स्वीकार कर लेती हैं तो वह इन मान्यताओं के चंगुल में फंस कर अपनी निर्णय क्षमता को देती हैं इसका एक कारण वह पितृसत्ता का माहौल है जिसमें वह बड़ी हुई और जिसने उनको बचपन से ही खुद के श्रेय और आत्म-सम्मान को नकारना और आत्मविश्वास को नष्ट करना सिखाया है । इस प्रकार पितृसत्ता धर्म और रीति रिवाज का गलत प्रयोग कर माहवारी को शर्मिंदगी से जोड़ती है और औरतों के प्रजनन अधिकारों को बाधित करती है। माहवारी ईश्वर द्वारा प्रदत्त एक शारीरिक क्रिया है इस दौरान निकलने वाला खून वही होता है जो हमारे शरीर के और हिस्सों में दौड़ रहा है माहवारी के दौरान निकलने वाले खून में और उस खून में जो हमारी उंगली कटने पर बहता है उसमें कोई अंतर नहीं होता माहवारी के समय किशोरियां /महिलाएं गंदी नहीं होती हैं और धार्मिक गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकती हैं, माहवारी के दौरान निकलने वाला खून वही होता है जिसको हम भोजन के रूप में ग्रहण कर नौ महीने मां के गर्भ में बड़े होते हैं ।”
 
माहवारी स्वच्छता प्रबंधन सिर्फ कागजो पर
बहराइच में तो माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति करके सरकारी योजनाओं को ठेंगा दिखाया गया है जिले में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर किए गए कार्यो व दी गई सरकारी योजनाओं का हाल जानने की कोशिश की गई तो कुछ इस प्रकार आंकड़े निकल कर आए —बहराइच में ICDS के आंकड़ों के अनुसार 186852 स्कूलों में पढ़ने वाली कुल किशोरियां 145919 इस प्रकार 11 वर्ष से 18 वर्ष तक बहराइच में कुल किशोरियों की संख्या 332771, CMHD विभाग के संजय भारद्वाज के अनुसार वर्ष 2017 18 में वितरित किए गए कुल सैनिटरी नैपकिन पैड की संख्या 218711 इस प्रकार यदि कुल किशोरियों की संख्या तथा वितरित किए गए कुल सेनेटरी पैड की संख्या पर नजर डालें तो 114060 किशोरियां सरकारी सेनेटरी नैपकिन पैड से वंचित रह गई हैं । जिले के इन सरकारी आंकड़ों के अनुसार 218 711 किशोरियों को सिर्फ एक बार एक ही सेनेटरी नैपकिन पैड का वितरण हुआ है, जबकि सरकार की माहवारी स्वच्छता प्रबंधन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह प्रति किशोरी को पांच सेनेटरी नैपकिन पैड वितरित करने की योजना है । इस तरह जिले में कुल  332771 किशोरियों पर प्रतिमाह 1667855 सेनेटरी नैपकिन पैड का वितरण होना चाहिए जो इस जनपद में मुंगेरीलाल के सपनों सरीखा है। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के बहराइच जनपद के जिला कोऑर्डिनेटर राकेश गुप्ता के अनुसार जिले में अब तक 1320 पियर एजुकेटर का चयन कर लिया गया है यह समुदाय स्तर के स्वयंसेवक होंगे , अब तक कुल 18 बैच की ट्रेनिंग हो चुकी है जिसमें 596 पियर एजुकेटर तथा 149 आशाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है अभी 23 बैच की ट्रेनिंग होना बाकी है। प्रशिक्षित होकर यह पियर एजुकेटर गांवों में जाकर किशोर किशोरियों का समूह बनाएंगे और उन्हें जागरुक करेंगे ।
 
 

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Umesh Chaturvedi

जेनरिक दवाइयां अनिवार्य रूप से देश के सभी दवा दुकानों पर उपलब्ध होनी चाहिए

1 comment

विश्व नाथ May 28, 2018 at 9:58 pm

स्वस्थ भारत : एक परिचय’ पुस्तिका का पीडीएफ चाहता हूं

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