स्वास्थ्य की बात गांधी के साथ

चल झांक ले उसकी ऐनक से…

Gandhi supported kerala when flood came there

स्वास्थ्य की बात गांधी के साथ विषय वेब सीरीज में आज हम निलाक्षी मल्लिक की कविता प्रस्तुत कर रहे हैं। इस सीरीज की  यह 11 वी प्रस्तुति है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से उन्होंने गांधी के चिंतन को समझाने का प्रयास किया है। खासतौर से युवाओं को संबोधित करते हुए निलाक्षी ने उनसे उम्मीद जताई है कि वे गांधी के चिंतन को समझेंगे और उसकी ऐनक से वस्तु स्थिति को समझने का प्रयास करेंगे तो निश्चित रूप से एक स्वस्थ समाज की संकल्पना को मजबूत कर पाएंगे।- संपादक
 

 
 
 
निलाक्षी मल्लिक, संयोजक, द पीस गॉग
 
चल झांक ले उसकी ऐनक से/एक नया जहां दिखेगा
चल झांक ले उसकी ऐनक से / उजला सवेरा महकेगा।
तू खोज, निकाल अपने अंदर के एक-एक गांधी को
दर मज़हब जात-पात की चिंता छोड़,
फिर तू, खुद भी चमकेगा, जहां भी चमकेगा।
 
रौशनी के साथ कदम से कदम जो बढ़ायेगा,
रास्ता स्वयंमेव गमकेगा, कारवां भी चहकेगा
 
रख हिम्मत तू, अपनी जीत की लड़ाई के लिए
रख हौसला तू आगे की चढ़ाई के लिए / रूख बदल सके तो भी बदल के चल,
छोड़ न हाथ किसी का सबको संग लेके चल।
 
आज भी उस आजादी की है जरूरत/ उसी जज्बे की उम्मीद है हमको
जो बिना लड़े ही दिलाई थी जीत उसने/ अहिंसा के पथ पर चलाया था जिसने
उसी पथ पर चलकर, देश को आज तू रौशन कर।


नोटः महात्मा गांधी ने जितने भी प्रयोग किए उसका मकसद ही यह था कि एक स्वस्थ समाज की स्थापना हो सके। गांधी का हर विचार, हर प्रयोग कहीं न कहीं स्वास्थ्य से आकर जुड़ता ही है। यहीं कारण है कि स्वस्थ भारत डॉट इन 15 अगस्त,2018 से उनके स्वास्थ्य चिंतन पर चिंतन करना शुरू किया है। 15 अगस्त 2018 से 2 अक्टूबर 2018 के बीच में हम 51 स्टोरी अपने पाठकों के लिए लेकर आ रहे हैं। #51Stories51Days हैश टैग के साथ हम गांधी के स्वास्थ्य चिंतन को समझने का प्रयास करने जा रहे हैं। इस प्रयास में आप पाठकों का साथ बहुत जरूरी है। अगर आपके पास महात्मा गांधी के स्वास्थ्य चिंतन से जुड़ी कोई जानकारी है तो हमसे जरूर साझा करें। यदि आप कम कम 300 शब्दों में अपनी बात भेज सकें तो और अच्छी बात होगी। अपनी बात आप हमें forhealthyindia@gmail.com  पर प्रेषित कर सकते हैं।
 

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