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“विलासपूर (छत्तीसगढ) दुर्घटना ड्रग डिपार्टमेंट की लापरवाही का नतीजा” – युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट्स

प्रेस विज्ञप्ति

लोगों की जान  से खेलने वालों से हो जाएं सावधान!
लोगों की जान से खेलने वालों से हो जाएं सावधान!

नसबंदी जैसे छोटे से ओपरेशन के बाद जिस तरीके से २० महिलाओं की मृत्यु हुई उसके लिए नॉनफार्मासिस्टद्वारा खरीदी और वितरित की गई घटिया दवाई जिम्मेदार है ऐसा सामने आया है. केवल अपना कमीशन, और ज्यादा से ज्यादा कमीशन के लालची ना तो दवाइयों की समझ रखते है और ना ही मरीजों की जान की परवाह करते है. ड्रग्ज और कॉस्मेटिक्स एक्ट का कड़ी से पालन किया जा रहा होता तो बेगुनाहों की मौत ना होती. किन्तु राज्य के ड्रग कंट्रोलर, जिन्हें वहाँ बेहतरीन तरीके से कानून का अनुपालन कराया जा रह है ऐसा हमारे फार्मासिस्ट शिष्टमंडल को पुरे आत्मविश्वास के साथ बताना और उसके महज कुछ दिनों बाद यह दुर्घटना होना सीधे सीधे ड्रग कंट्रोलर का अपने कर्तव्यों के प्रति इमानदार ना होना दिखाता है.
गौरतलब है की युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्टस् (युआरपी)ने पिछले वर्ष 19 दिसंबर 2013 को केन्द्रीय स्वस्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को “देश भर में ड्रग्ज एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 का सक्ती से पालन करने के लिए कदम उठाये जाए” ऐसा निवेदन दिया था. इस पर तुरंत हलचल में आते हुए मंत्रालय के अवर सचिव ने भारत के ड्रग्ज कंट्रोलर जनरल को इस सन्दर्भ में एक परिपत्रक जारी करने के लिए कहा गया था. जिसके बाद डेप्युटी ड्रग कंट्रोलर ऑफ़ इंडिया की ओर से देश के तमाम राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स के नाम पत्र लिख कर कानून का कड़ाई से पालन किया जाये और समय समय पर उसकी सूचना विभाग को देने के निर्देश दिए थे. कुछ एक राज्यों ने इसको गंभीरता से तो लिया पर छत्तीसगढ़ समेत ज्यादातर राज्यों के ड्रग डिपार्टमेंट ने इसको अनदेखा करके ड्रग माफिया को जनता के स्वस्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का मौका दिया.
इसके बाद ‘युआरपी’ने (घटना से ठीक कुछ दिन पहले) इस (नवम्बर) महीने की 5 तारीख को फिर से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री, केन्द्रीय फार्मास्यूटिकल विभाग के मंत्री को ड्रग्ज एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट तथा फार्मसी एक्ट के उल्लंघन के बारे में आगाह करते हुए देश में इसको सक्ती से लागू करने के कहा था. इसकी एक कॉपी प्रधानमंत्रीजी को भी दी गयी थी.
इस कानून के पालन से दवाइयों का घटिया उत्पादन, उसकी मार्केटिंग, खरीद-बिक्री, फार्मासिस्ट की गैरमौजुदगी में वितरण करना, मरीजों को गलत, एक्सपायर्ड दवाइयां देना, उनकी लूट करना, बिल ना देना, आदि गैरकानूनी मामलों पर रोक लग सकती है. अगर छत्तीसगढ़ का दवा यावं खाद्य विभाग भी इसको गंभीरता से लेता तो इन चीजों पर लगाम लग जाती और यह हादसा टल जाता.

उमेश खके,

अध्यक्ष,
युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्टस् (युआरपी)

 

प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

प्रति,
माननीय प्रधानमंत्रीजी,
भारत सरकार.

विषय: विषय: ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट तथा फार्मसी एक्ट का कड़ाई से पालन करने हेतु अनुरोध.

आदरणीय महोदय,
उपरोक्त विषय के सन्दर्भ में युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट्स (युआरपी) द्वारा आपकी सेवा में यह निवेदन प्रस्तुत किया जाता है. आज देशभर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सी गयी है। चंद पैसे बचाने की खतिर राज्य सरकार के उदासीन रवय्ये से तथा ड्रग कंट्रोलरों के भ्रष्ट एवं अकार्यक्षम तरीकों की वजह से लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रही है. एकतरफ राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित अस्पतालों में नियमों का उल्लंघन किया जाना मरीजों की जान पर बित रहा है तो केंद्र सरकार के अस्पताल भी इससे पीछे नहीं है. इएसआयएस, रेल्वे, आदि केंद्र सरकार के विभागों द्वारा दी रही स्वास्थ्य सेवाओं नियमों की अनदेखी और ज्यादा तर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट तथा फार्मसी एक्ट के घोर उल्लंघन के चलते फार्मासिस्ट के बगैर खुलेआम दवा का वितरण, मरीजों को एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई, गलत दवाई का डोस, वरिष्टों द्वारा फार्मासिस्ट का उत्पीडन जैसे गंभीर मामले सामने आ रहे है. आप से अनुरोध है की देश भर में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट तथा फार्मसी एक्ट का कड़ाई से पालन करके जनता का स्वास्थ्य सुरक्षित करे तथा तथा फार्मासिस्ट को न्याय दे.

हाल ही में वेस्टर्न रेलवे द्वारा संचालित मुंबई की महालक्ष्मी डिस्पेंसरी में विगत कई सालों से फार्मासिस्ट कि गैरमौजूदगी में चल रही दवा वितरण को तुरंत रोक दिए जाने की नोटिस फार्मसी इन्स्पेक्टर ने दी है. यह एक प्रतिनिधिक उदहारण है. रेलवे के अन्य अस्पतालों में भी इसी तरह गैरकानूनी तरीकों से दवा वितरित करके मरीजों की जान के से साथ खिलवाड़ की जा रही है. एक RTI के जवाब में तो वहाँ के सूचना अधिकारी ने फार्मासिस्ट ना होने की बात स्वीकारते हुए यह तक कह दिया नर्स को भी दवा डिस्पेंसिंग का अधिकार है. गौरतलब है की वर्ष 2013 के दिसंबर महीने में जब ‘यूआरपी’ ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री तथा स्वास्थ्य सचिव को ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट तथा फार्मसी एक्ट का कड़ाई से पालन किये जाने के सन्दर्भ में लिखे पत्र के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल के कार्यालय से सभी राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स को सूचनाएं दी गयी थी. मगर यह महज एक औपचारिकता भर रह गया था. किन्तु इस बेहद संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण विषय को दुर्लक्षित किया जाने से कल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में ईएसआईएस अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को एक्सपायर्ड मेडिसिन्स दिए जाने की घटना सामने आयी है.

हम आपके ध्यान में यह भी लाना चाहते है की कुछ दवा व्यापारी संघटनोंद्वारा दवा माफियागिरी को बढ़ावा दिया जा रहा है। कई जगह तो इनके नेता पोलिटिकल प्रोटेक्शन हासिल किये हुए है. कुछ प्रादेशिक पार्टियों के बलबूते पर ये समाजविरोधी तत्त्व देश के संवैधानिक ढांचे को ही चुनौती देते आ रहे है. अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन कर रहे खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर श्री. महेश झगड़े की वजह से ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का काफी हद तक अच्छे तरीके से अनुपालन किया जा रहा था. इसी वजह से पिछले कुछ सालों में ड्रग माफियाओं का प्रभाव काफी कम हुआ है. किंतु बात बात पर यहाँ के दवाविक्रेता संघटनो के नेताओं ने उन पर दबाव बना कर फिर से अपने गैरकानूनी धंदे शुरू करना चाहे. जब यह संभव ना हो सका तो साड़ी ताकद लगाकर उनका तबादला कर दिया गया. आप से विनम्र अनुरोध है की ऐसे माफियाओं को सख्त से सख्त सजा दी जाये.

फार्मसी एक्ट के तहत बनी फार्मसी कौंसिल ऑफ़ इंडिया और राज्यों की फार्मसी कोउन्सिल्स का काम भी अपने मक्सद से भटक गया है। कुछ जगह दवा व्यापारियों के हाथों का खिलौना भर रह गया है। ऐसे में मूल हेतु साध्य होने की बजाय सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है। आज देश में कई सारे फार्मसी शिक्षा संस्थान फर्जी फार्मासिस्ट बना रहे है. ना तो कॉलेज करने की जरुरत और ना ही एग्जाम देने की जरुरत; घर बैठे दो-चार लाख रुपये में फार्मसी के डिप्लोमा/डिग्री के (और जरुरत पड़ी तो SSC और HSC के भी) सर्टिफिकेट बेचे जा रहे है. यह एक बड़ा रैकेट बन गया है. इस बारे में पीसीआई समेत सीबीआई को भी कई दफा जानकारी दी गयी है. लेकिन ऐसे फर्जी फार्मासिस्ट बनानेवाली फार्मसी शिक्षा संस्थाओं पर कुछ भी एक्शन नहीं लिया जा रहा है. यह फर्जी लोग स्वास्थ्य सेवा में आक कर जनता की सेहत से खेल रहे है.

व्यापक जनहित की खातिर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट और फार्मसी एक्ट का पालन हो यह आप से विनम्रतापूर्वक अनुरोध है।

आशा है की आप के नेतृत्व में देश का स्वास्थ्य बेहतर होगा. जल्द से जल्द उत्तर की अपेक्षा.
धन्यवाद!

उमेश खके,
अध्यक्ष,
युनियन ऑफ रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट्स (युआरपी).

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