ऑनलाइन दवा बेचनेवाले ई कॉमर्स कंपनियों को तुरंत बंद करने का फरमान

 

नई दिल्ली/

ऑनलाइन दवा वेचनेवाले ई फार्मेसी पर सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ेड कंट्रोल आर्गेनाईजेशन (CDSCO) ने सख्त रुख अपना लिया है। जॉइंट ड्रग कंट्रोलर ई ऐश्वर्या रेड्डी ने देश भर के स्टेट ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिखकर ई कॉमर्स कंपनियों पर क़ानूनी  करवाई करने का आदेश जारी किए हैं। इसे देखते हुवे दिल्ली मुंबई पुणे अहमदाबाद हैदराबाद समेंत कई बड़े शहरों में दवा का ऑनलाइन कारोबार करने वाली ई कॉमर्स कंपनियों ने अपने वेबपोर्टल ब्लॉक करना शुरू कर दिए हैं। ज्ञात हो कि महाराष्ट्र एफडीए ने पिछले दिनों गैर क़ानूनी रूप से दवा वेचने पर कुछ नामी ऑनलाइन कंपनियों पर छापे मारे थे। चूँकि मामला देश भर में अवैध चल रहे गैरकानूनी ई फार्मेसी का था। जिसे देखते हुवे महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया को पत्र लिखकर रोक लगाने की मांग की थी। देश भर के फार्मासिस्ट संगठनों ने ख़ुशी जाहिर की है।

 

कोटला रोड, नई दिल्ली स्थित ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया का मुख्यालय

कोटला रोड, नई दिल्ली स्थित ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया का मुख्यालय

अभी दो तरह से चल रही है ई-फार्मेसी

देश में वर्तमान में दो तरह से ई-फार्मेसी का कारोबार चल रहा है। कुछ ऑनलाइन वेबसाइट्स पाटर्नर फार्मेसियों से दवा खरीद कर उपभोक्ता के घर तक दवाओं की डिलीवरी करती हैं। कुछ फार्मेसियां ऑनलाइन ऑर्डर पर अपने आउटलैट के जरिए दवा पहुंचाती है। ऑनलाइन फार्मेसी की हो जांच देश में ऑनलाइन फार्मेसी को अधिक कारगर और उपभोक्ता हितों के अनुकूल बनाने के लिए सरकार को ऑनलाइन फार्मेसी लाइसेंस जारी करने के लिए विस्तृत जांच करनी होगी। देखने में आया है कि कुछ ऑनलाइन फार्मेसी अपना फर्जी आईपी एड्रेस देती हैं। जिसके चलते गलत अथवा अवधिपार दवा उपभोक्ता को मिलने की स्थिति में ऑनलाइन फार्मेसी का पता ही नहीं चल पाता है। संबंधित ऑनलाइन फार्मेसी को लाइसेंस देने से पहले उसका ट्रेक रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और अन्य जानकारियां भी सरकार के पास होनी चाहिए। ऑनलाइन फार्मेसी नियमन के लिए समिति ऑनलाइन फार्मेसी के नियमन के लिए केंद्र ने महाराष्ट्र के खाद्य एवं दवा प्रशासन (एफडीए) कमिश्नर डॉ. हर्षदीप कांबळे की अध्यक्षता में उपसमिति गठित की है। जिसमे आईटी एक्सपर्ट समेंत कई राज्यों के एफडीए अफसर और केमिस्ट संगठनो के प्रतिनिधि है जिन्हे भारत में ऑनलाइन दवा कारोबार को समझकर ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट के नियमों में बदलाव हेतु मंथन कर समाधान तलाशना है! महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश तांदळे ने एफडीए कमिश्नर डॉ. हर्षदीप कांबळे को पत्र लिखा कर फार्मासिस्ट सदस्यों को भी सलाहकार समिती जगह बनाने को कहा है!

 

मुंबई में उठे थे विरोध के सुर

ऑनलाइन फार्मेसी पर सबसे पहले विरोध महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट संगठन ने मुंबई में शुरू किया फिर धीरे धीरे पुरे देश भर में जोर शोर से बिरोध शुरू हो गया ! यह तस्बिर महाराष्ट्र ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन के बाहर प्रदर्शन कर रहे फार्मासिस्टों की है यहाँ एफडीए मुख्यालय, बांद्रा में एमआरपीए के सदस्यों ने 31 अगस्त 2015 को चाय वेचकर आंदोलन का आगाज़ किया था

ऑनलाइन दवा विक्री के विरोध में MRPA के सदस्य

ऑनलाइन दवा विक्री के विरोध में MRPA के सदस्य

 

 

“ऑनलाइन दवा खरीद के लिए डॉक्टर के प्रेस्क्रिप्शन के आधार पर दवाएं खरीदी जा सकेंगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। बिना प्रेस्क्रिप्शन के दवा खरीदना बेहद जोखिम भरा होगा। हां, व्यक्ति प्रेस्क्रिप्शन को स्कैन करके दवा कंपनी को भेजा जा सकता है और कंपनी में विशेषज्ञ फार्मासिस्ट उसे पढ़कर दवाएं भेज भी सकता है। लेकिन, दवा लिखने वाले की प्रामाणिकता को जांचने की जिम्मेदारी दवा कंपनियां ले पाएंगी, इसमें भारी संदेह है। वर्तमान में खुदरा दवा विक्रेता डॉक्टर की लिखी दवाइयों पर असमंजस की स्थिति में फोन पर डॉक्टर से संपर्क करके संतुष्टि भी कर लेता है। क्या इतनी विश्वसनीयता के साथ ऑनलाइन दवा बिक्री कंपनियां सेवाएं दे पाएंगी? यह बात समझ से परे है। अगर किसी ने फ़र्ज़ी प्रिस्क्रिप्सन पर नशीली दवाई या गर्व निरोधक दवाई का आर्डर कर दिया तो उसे आसानी से प्राप्त कर सकता है।“ – कैलाश तांदळे, अध्यक्ष, महाराष्ट्र रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट एसोसिएशन।

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