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हमरा लगे तोहरा लोगन के आशीष देवे के सिवा कुछु ना हैःमहादेव भगत

    • महादेव को मिला पत्नी की लाश, गांव वालों के सहयोग पूरी हुई अंत्येष्टि
    • महादेव को न्याय कब मिलेगा ?
    • मीडिया वालों को धन्यवाद दिया

वैशाली/पटना

सुमित्रा देवी के पति व चार बच्चे...
सुमित्रा देवी के पति व चार बच्चे…

वैशाली विधानसभा क्षेत्र के भगवानपुर रत्ति गांव में महादेव को उनकी पत्नी का लाश मिलने की खबर ने ग्रामीणों को भावविह्वल कर दिया था। परिजनों को सूचना दी गयी थी कि स्थानीय पुलिस सुमित्रा देवी का लाश लेकर महादेव के घर आ रही है। जब पुलिस लाश लेकर पहुंची तो पूरा गाँव महादेव के घर पहुंचा हुआ था। एक तरफ मातम का माहौल था वहीं दूसरी तरफ गांव वालों में इस बात का संतोष था कि मीडिया के सहयोग से गरीब महादेव को पांच दिन बाद ही सही उसकी पत्नि की लाश तो मिली। गांव के सहयोग से महादेव ने अपनी पत्नी की अंत्येष्टि आज सुबह की। अंत्येष्टि के बाद बात करते हुए महादेव ने कहा कि मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं अपनी  पत्नी का अंतिम दर्शन कर पाऊंगा…लेकिन यह सब आप लोगों के कारण भइल है। हमरा पास तोहरा लोगन के आशीष देवे के सिवा  कुछु ना है।
अभी तक एफआईआर नहीं!
19 अक्टूबर को जब सबसे पहले इस वेब-पोर्टल पर महादेव की पत्नी की लाश न दिए जाने की खबर चलाई गई, तब स्थानीय मीडिया व प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की। लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक शांति केयर क्लिनिक पर एफआईआर नहीं दर्ज किया गया है। ग्रामिणों को स्थानीय पुलिस ने यह कहा कि इस मामले को ज्यादा तुल देने की जरूरत नहीं है। एक ग्रामीण ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया  कि कुशवाहा जी (पुलिस वाले जो लाश के साथ आए थे) कह रहे थे कि, केस करने से क्या फायदा होगा, तुम्हारे गांव की फोटो मीडिया वाले दिखायेंगे, इस गांव के मरीजों का इलाज बड़े अस्पताल नहीं करेंगे! पुलिस के इस तरह के बयानबाजी के चक्कर में आकर ग्रामीणों ने यह फैसला किया कि अब केस नहीं किया जायेगा। वैसे भी महादेव बहुत गरीब है, उसके चार-चार बच्चें हैं वह केस-फौजदारी के चक्कर में पड़कर अपनी बची जिंदगी क्यों बरबाद करे।
पटना के एसएसपी ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में पटना के एसएसपी विकास वैभव ने कहा कि, यदि परिवार के लोग पुलिस से यह शिकायत करते है कि अस्पताल ने पैसे के लालच में शव नहीं दिया तो पुलिस इसकी जाँच करेगी।
तो कैसे मिलेगा न्याय
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि महादेव का परिवार ऐसा नहीं है कि वह पुलिस-कोर्ट के चक्कर लगा सके तो क्या पुलिस का यह दायित्व नहीं है कि वह इस मामले की संज्ञान लेते हुए खुद जाँच करे और महादेव के परिवार वालों को न्याय दिलाए।
अस्पताल को हमारी बददुआ
शांति केयर के इस जल्लादी कर्म के बारे में ग्रामीणों का कहना है कि इस अस्पताल की इस क्षेत्र में जितनी बदनामी हुई है, वहीं उसका दंड़ है। अब शायद ही कोई इस अस्पताल में किसी मरीज को लेकर जायेगा। एक बुजुर्ग ने कहा कि महादेव के साथ अस्पताल ने जो किया है उसकी सजा उसे भगवान देंगे। हमारी बददुआ से वेलोग बच नहीं सकते।
क्या था पूरा मामला
बिहार के वैशाली विधान सभा क्षेत्र के भगवापुर रत्ति, थाना भगवानपुर के महादेव भगत की पत्नी की तबयीत खराब होने पर स्थानीय सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पर तबीयत न संभलने पर उन्हें पीएमसीएच, पटना के लिए रेफर कर दिया गया। लेकिन बीच में ही दलालों के चंगुल में फंस गए और एक प्राइवेट अस्पताल में पत्नी को एडमिट करा दिया। पटना के अगमकुँवा स्थित शांति केयर क्लिनिक में मरीज को भर्ती कराने के एक घंटे में ही महादेव भगत की गर्भवति पत्नि सुमित्रा देवी ने दम तोड़ दिया। एडमिशन के समय अस्पताल ने 60000 रुपये लिए। यहां बताता चलूं कि यह रूपया महादेव भगत ने अपनी जमीन का अंतिम टुकड़ा बेचकर इकट्ठा किए थे। एडमिशन के एक घंटे के अंदर ही मरीज ने दम तोड़ दिया। अस्पताल ने घर वालों से 1 लाख 20 हजार और देने की बात कही। बिहार का अति पिछड़ा समुदाय से आने वाला भगत परिवार के पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं थी। बहुत गिड़गिड़ाया परिवार वालों ने किसी ने नहीं सुनी और उनके सारे कागज को छीन लिया गया और उन्हें वहां से भगा दिया गया।
पुवाल के पुतला की अंत्येष्टि की तैयारी में परिजन
पिछले चार दिनों में जब अस्पताल ने लाश नहीं दिया तब वहां के ग्रामीणों ने पुवाल का पुतला बनाकर उसका प्रतिकात्मक अंत्येष्टि करने की तैयारी कर ली । इसी बीच 125 वैशाली विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे अमीय भूषण की टीम जब उस गांव में चुनाव प्रचार करने पहुंची तो उसे इस मामले की जानकारी मिली। अमीय भूषण ने इस मामले की कड़ी निंदा करते हुए इस मामले में एफआईआर कराने की बात कही है। समाचार लिखे जाने तक एफआईआर कराए जाने की बात चल रही थी। गांव के लोगों का कहना है कि हो सकता है कि अस्पताल लाश को गायब कर दिया हो।
धमकी भी दिया जा रहा था
गौरतलब है कि इस मामले को दबाने के लिए अस्पताल प्रशासन धमकी देना भी शुरू कर दिया है। एक स्थानीय व्यक्ति ने अपना नाम न बताने के शर्त पर बताया कि अस्पताल प्रशासन इस मुद्दे को आगे न बढ़ाने के लिए धमकी दे रहा है।
स्वस्थ भारत अभियान ने सबसे पहले उठाया था यह मामला
स्वस्थ भारत डॉट इन पर खबर छपने के बाद, महादेव को पत्नी की लाश मिली
स्वस्थ भारत डॉट इन पर खबर छपने के बाद, महादेव को पत्नी की लाश मिली

महादेव भगत की स्थिति की खबर 19 अक्टूबर को स्वस्थ भारत डॉट इन को मिली। खबर मिलते ही इस बावत स्थानीय लोगों से हमारी टीम के सदस्यों ने बात की। खबर की पुष्टि होते ही इस वेबपोर्टल पर यह खबर चलाई गयी। इसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पटना की स्थानीय मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया। तब जाकर प्रशासन पर दबाव पड़ा और वो आज सुबह महादेव की पत्नी का शव उसके घर आकर सुपुर्द कर गयी।
कुछ अनसुलझे सवाल

  • अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
  • जब अस्पताल के पास परिजनों का पूरा व्योरा था उसके बाद भी शव को लावारिस क्यों रखा गया?
  • अस्पताल ने पुलिस को पूरी कहानी क्यों नहीं बताई?
  • परिजनों क पोर्स्टमाटम रिपोर्ट  क्यों नहीं मिली है?

 
 
 

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