अस्पताल समाचार

MMU की तानाशाही: नर्सिंग की छात्राओं का हुक्का-पानी किया बंद, सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल छोड़ निकली अपने घर की ओर…

नई दिल्ली/अम्बाला

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा फी में नहीं हुई है बढ़ोतरी, छात्र संगठनों के बहकावें में में आकर छात्राएं कर रही थी हड़ताल

मुलाना,अंबला, हरियाणा के एमएमयू में सैकड़ों नरसिंग छात्राओं का हूक्का-पानी कर दिया गया है बंद…

मेडिकल कॉलेजों में बेहतर पढ़ाई हो इसको लेकर बेसक सरकार एनएमसी बिल लाने की तैयारी कर रही है लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले अंबाला के मुलाना स्थित महर्षि मार्कन्डेश्वर विश्वविद्यालय के प्रसाशन ने सैकड़ों नर्सिंग छात्राओं का हूक्का-पानी बंद कर दिया है। सैकड़ों लड़कियों को विश्वविद्यालय छोड़कर अपने घर जाना पड़ रहा है। पिछले कई दिनों से नर्सिंग विभाग की छात्राएं होस्टल फी बढाए जाने को लेकर हड़ताल पर थी। उनका हड़ताल खत्म कराने का नायाब तरीका विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनाया है. लड़कियों के मेस को बंद कर दिया गया. क्लासेस बंद कर दी गईं। उनके हॉस्टल में ताला जड़ दिया गया।

विश्वविद्यालय प्रागण में हड़ताल पर बैठी बीएसी नर्सिंग की छात्राएं…

खौफ में लड़कियां अपने विश्वविद्यालय को छोड़कर अपने घर या नजदीक के किसी दोस्त-रिश्तेदार के यहां जाने को मजबूर हो गई हैं। नर्सिंग की एक छात्रा ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रशासन ने फी बढ़ोतरी को लेकर पहले कोई नोटिस तक नहीं दिया। जब वे अपना नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेने गयी तो मालूम चला कि 4 हजार रुपये और देने हैं। एक दूसरी छात्रा ने बताया कि यह फी सिर्फ उन्हीं छात्राओं से लिया जा रहा हैं जिनके रुम में बालकनी है। जबकि दूसरी छात्राओं का फी नहीं बढ़ा है। इसको लेकर हम छात्राओं में रोश है। एक छात्रा ने बताया कि होस्टल एवं मेस में जब कोई नई सुविधा बढ़ी ही नहीं तो इस तरह से फी बढाने का क्या मतलब है।

Founder Chancellor, MMU

वहीं दूसरी तरफ इस मामले में स्वस्थ भारत ने जब यूनिवर्सिटी के संस्थापक तारसेम गर्ग से बातचीत की तो उन्होंने किसी भी फी बढ़ोतरी से इंकार किया। उनका कहना है कि कुछ छात्र संगठनोें के उकसावे में आकर इस तरह का प्रदर्शन किया जा रहा है। हमनें छात्राओं को कहा है कि उनके अभिभावक आकर मिले ,हम बातचीत के लिए तैयार हैं। हॉस्टल बंद करने के निर्देश के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी निर्देश विश्वविद्यालय प्रशासन ने नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया इन नरसिंग छात्राओं पर है। जहां तक होल्टल का सवाल है तो हॉस्टल मे ंही रहना अनिवार्य नहीं है। जिनको बाहर रहना हैं वो बाहर रहें।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि सैकड़ों छात्राओं ने विश्वविद्यालय में जो हड़ताल किया वह अकारण ही है। ज्यादातर लड़कियां खाना-पानी बंद होने के बाद हॉस्टल छोड़कर चली गई हैं, यह भी झूठ है! जहां तक 1 करोड़ के बकाया का सवाल है तो वह स्वाभाविक रुप से होगा ही। क्योंकि जब हॉस्टल फी अवैध तरीके से बढ़ने के कारण छात्राओं ने फी नहीं भरा तो बकाया तो होना ही है।

सबसे बड़ा सवाल

लड़कियों का हुक्का पानी यानी मेस बंद करने का निर्देश क्या न्यायसंगत है?

नरसिंग छात्राओं का हॉस्टल बंद करना क्या सही कहा जा सकता है?

क्या अवैध फी वसूली के खिलाफ लड़कियों को बोलने का अधिकार नहीं है?

इन तमाम सवालों का जवाब तो विश्वविद्यालय प्रशासन को आज नहीं तो कल देना ही पड़ेगा।

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