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फार्मासिस्टों की ललकार… हार्मासिस्ट बाहर जाओ…

आंध्रप्रदेश के पीसीआई अध्यक्ष श्री रेड्डी ने पीसीआई के अधिकारियों को कहा फार्मेसी के गुनाहगार

फार्मा सेक्टर में सुधार की दिशा में एकजुट हुए फार्मासिस्ट
असम से लेकर तमिलनाडु तक के फार्मासिस्टों ने दिखाई एकजुटता

फार्मा-सम्मेलन-2015
फार्मा-सम्मेलन-2015

फार्मा सेक्टर में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर के फार्मासिस्ट एकजुट होने लगे हैं। नई दिल्ली के ग़ालिब ऑडिटोरियम आयोजित राष्ट्रीय-फार्मा सम्मेलन में देश भर के फार्मासिस्ट संगठन एक मंच पर दिखाई दिए। दक्षिण भारत, उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर के असम, नागालैंड से पहुंचे फार्मासिस्टों ने एक सुर में कहा-पूरा फार्मा सेक्टर फार्मासिस्टों के नाम पर चलाया जा रहा है लेकिन फार्मासिस्टों की स्थिति बहुत ही दैनीय है। जो फार्मासिस्ट सरकारी जॉब में हैं उनके पे-स्केल में अलग-अलग राज्यों में दोगुना का अंतर है। उतराखंड सरकार जहाँ 4600 रुपये का पे-स्केल दे रही है वही मध्यप्रेदश सरकार 1900 रुपये। साथ ही फार्मासिस्टों ने फार्मेसी की पढाई ओपन स्कूलिंग में कराए जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। फार्सिस्टों का कहना था कि यदि फार्मा की पढ़ाई ओपन-स्कूल में होगी तो फार्मासिस्टों की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

गौरतलब है कि फार्मासिस्ट को फार्माकोलॉजी का अच्छा ज्ञान होता है। दवा के डोज निर्धारण से लेकर, भंडारण व वितरण की जिम्मेदारी फार्मासिस्टों की होती है। ऐसे में यदि अपने विषय को ठीक से समझने वाले फार्मासिस्ट नहीं आए तो इसका दुष्परिणाम स्वास्थ्य-सेवा को उठाना पड़ सकता है। साथ ही फार्मेसी के कोर्स में प्रैक्टिकल की अहम भूमिका होती है। यदि इसकी पढ़ाई ऐसे ही मुक्त महाविद्यालयों में होने लगे तो क्या होगा।

मंच की अध्यक्षता कर रहे फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ आन्ध्रप्रदेश के चेयरमैन विजय आर. अन्नापा रेड्डी ने अपने दो घंटे तक दिए लंबे संबोधन में भारत में फार्मेसी के हालात के बारे में फार्मासिस्टों को अवगत कराया। फार्मेसी कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बी.सुरेश की कार्यप्रणालियों पर उंगली उठाते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि फार्मसी को बदनाम कर के रख दिया हैं इन लोगों ने। पीसीआई की सचिव अर्चना मुद्दगल को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा-फार्मेसी की पहली गुनाहगार अर्चना मुद्गल है। इस बीच श्री रेड्डी से फार्मासिस्टों ने सवाल-जवाब भी किया।

फारमा-16

इस आयोजन के मुख्य अतिथि व स्वस्थ भारत अभियान के राष्ट्रीय संयोजक आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि-स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा व व्यापक विषय है। आज हम इस विषय के एक महत्वपूर्ण पहलू पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में फार्मासिस्टों की उपयोगिता को मैं बहुत ही महत्वपूर्ण मानता आया हूं। मुझे लगता है कि जिस तरह से डॉक्टर, दवा व मरीज की चर्चा होती है, उस कड़ी में फार्मासिस्ट की चर्चा नहीं हो पाती। यह स्थिति दुर्भाग्यपूण हैं। जिस तरह से डॉक्टरों की इज्जत हम करते आएं हैं, उस कड़ी में फार्मासिस्ट को हम इज्जत नहीं दे पाएं हैं। आखिर ऐसा क्यों और कैसे हो गया। यह शोध का विषय हो सकता हैं लेकिन उससे भी पहले यह आत्मावलोकन का विषय भी है। आखिर क्यों फार्मासिस्ट समाज में अपनी वह इज्जत नहीं जमा पाएं जो उन्हें मिलनी चाहिए थी।

इस संदर्भ में जहां तक मैं समझ पाया हूं, मुझे लगता है कि एक तरफ सरकार की स्वास्थ्य नीतियां जिम्मेदार रही हैं लेकिन उसी के समानांतर मुझे यह भी लगता है कि फार्मासिस्टों ने जिस दिन से खुद को बेचना शुरू किया उस दिन से उनकी आवाज दबती चली गयी। आप मित्रो को यह पता लगाना होगा कि वह कौन पहला फार्मासिस्ट रहा होगा जिसने अपना सर्टीफिकेट चंद रुपयों की लालच में गिरवी रखा होगा। इन्हीं चंद रुपयों की लालच ने आपको कमजोर कर दिया। आप कभी एक नहीं हो पाएं। आपकी समस्याएं और बड़ी होती चली गयीं और आप मन ही मन कभी सरकार को तो कभी खुद को कोसते रह गए।’

पूरे देश से फार्मासिस्टों को एकजुट करने वाले एक्टिवस्ट विनय कुमार भारती ने कहा कि-हम चाहते हैं कि फार्मासिस्टों के हितो की रक्षा हो। इसके लिए हमें जो कुछ भी करना पड़े हम तैयार हैं। हम सड़क से लेकर जेल तक जाने के लिए तैयार है।
इस मौके पर, अमीत श्रीवास्तव सरवेश्वर शर्मा, जितेन्द्र सिंह, शिवकरण मील सहित सैकड़ों फार्मासिस्ट उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन धरमेन्द्र सिंह ने किया।

जंतर-मंतर पर धरना व पीसीआई का घेराव

देश भर से आए फार्मासिस्टों ने आज जंतर-मंतर पर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर फार्मेसी कॉउंसिल ऑफर इंडिया के अध्यक्ष बी.सुरेश से मुलाकात की। अचानक शाम को 3 बजे के आस-पास 60-70 फार्मासिस्ट पीसीआई के दफ्तर में जा घुसे। लगभग चार घंटे तक फार्मासिस्टों व पीसीआई के अधिकारियों के बीच बातचीत होती रही। समाचार लिखे जाने तक फार्मासिस्ट पीसीआई के दफ्तर में घुसे हुए थे।

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