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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट को इलाज़ करने के आदेश जारी

यह पहला मामला नहीं है जहाँ फार्मासिस्ट द्वारा इलाज़ करने की बात सामने आई हैं। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखण्ड, हरियाणा समेत देश के कई ग्रामीण क्षेत्रों के स्वस्थ केन्द्रों में जहाँ डॉक्टर नहीं जाते वहां फार्मासिस्ट ही ग्रामीण मरीज़ों का  इलाज़ करते है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने तो बतौर शासन आदेश के रखा है। जहाँ डॉक्टर अनुपस्थित होते है वहां फार्मासिस्ट इलाज़ कर सकते है। हाल में ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मीडिया के सामने कहा था की अगर उत्तरखंड को डॉक्टर नहीं मिलते तो फार्मासिस्ट को अस्पतालों में तैनाती दे देंगे। 

नैनपुर/ सागर / भोपाल (14.12.2015
 

फार्मासिस्ट कविता ठाकुर को मिले आदेश की प्रति
फार्मासिस्ट कविता ठाकुर को मिले आदेश की प्रति

प्राथमिक स्वास्थ केंद्र पिंडरई में अब महिला फार्मासिस्ट कविता ठाकुर वेरोकटोक इलाज़ कर सकेंगी। इस बावत नैनपुर के पीएचसी इंचार्ज ने आदेश जारी किया है। नैनपुर पीएचसी के चिकित्सा पदाधिकारी द्वारा जारी आदेश के सोशल मीडिया में वाइरल होने के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है। एक तरफ फार्मासिस्ट को संगठन इसकी सराहना कर इस आदेश को राज्य भर में लागू करने की मांग कर रहे है। दूसरी तरफ प्रशासन इसे प्राथमिक चिकित्सा पदाधिकारी की गलती मान रहा है। मध्य प्रदेश में फार्मासिस्ट द्वारा मरीज़ का इलाज़ करना कोई पहली घटना नहीं है पहले भी ऐसी कई बातें सामने आई हैं। दबी जुबान से आला  अधिकारी भी यह मानते है की डॉक्टर फार्मासिस्ट के भरोसे अस्पताल छोड़ कर नदारद रहते है। अबतक फार्मासिस्ट द्वारा इलाज़ के दौरान भूल के मामले नहीं आए हैं। फार्मासिस्ट  संगठनो द्वारा प्रिस्क्रिप्सन के अधिकार को लेकर पत्र मिले है पर इसपर फैसला सरकार को लेना है।
उधर प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने एमओआईसी के आदेश को सही बताया है। 13 दिसंबर को सागर जिले में आयोजित सम्मलेन में फार्मासिस्टों को प्रिस्क्रिप्सन के अधिकार समेत कई मुद्दों को लेकर आयोजित सेमिनार में प्रदेश भर के फार्मासिस्टों ने इस बावत विस्तृत चर्चा की। नैनपुर में फार्मासिस्ट को लिखित आदेश दिए जाने को लेकर एसोसिएशन का तर्क है ऐसा पहली बार नहीं है की फार्मासिस्ट किसी सरकारी अस्पताल में मरीज़ को अटेंड किया हो। पुरे प्रदेश में ऐसा ही होता है। सर्व विदित है ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी डॉक्टर नहीं के बराबर है। कुछ एक बहाल भी हुवे उनमे से अधिकांश डॉक्टर केवल रजिस्टर में ही उपस्थिति दर्ज़ कराते है। ऐसे में पीएचसी / सीएचसी में उपस्थित फार्मासिस्ट को ही मरीज़ो का इलाज़ करना होता है। अगर ऐसे में पिंडरई, नैनपुर के चिकित्सा पदाधिकारी ने अगर लिखित आदेश जारी किया है तो इसमें गलत कुछ भी नहीं। एसोसिएशन के प्रवक्ता विवेक मौर्य ने एमओआईसी का बचाव करते हुवे पुरे मध्य प्रदेश में इस आदेश को लागु करने की मांग की है। पीपीए के प्रदेश अध्यक्ष अम्बर चौहान ने बताया उत्तराखंड की सरकार ने जहाँ चिकित्सक उपस्थित नहीं होते वहां फार्मासिस्ट को इलाज़ करने का शासन आदेश पहले ही दे रखा है। मध्य प्रदेश सरकार  को भी इस दिशा में फैसला जल्द लेना चाहिए।
सागर जिले में सभा को सम्बोधित करते प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अम्बर चौहान
सागर जिले में सभा को सम्बोधित करते प्रांतीय फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अम्बर चौहान

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2 comments

ganesh kapsey December 14, 2015 at 3:41 pm

i like this & accept
of pharma clinic

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Tamiz Uddin Ahmed December 14, 2015 at 7:09 pm

Great achievement for Pharmacists.All state Govt.should do this where there is no sufficient Doctors.

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