स्वाइन फ्लू ने ली यूपी के महेश की जान

महेश को स्वाइन फ्लू निगलता रहा और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री चुप बैठे रहे…

अपोलो अस्पताल ने वसूले 5 लाख रुपये

नई दिल्ली/8.10.15

अभी डेंगू की मार से दिल्ली खुद को सम्भाल भी नहीं पायी है कि स्वाइन फ्लू ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के रहने वाले महेश चन्द्र गुप्ता की मौत बिती रात सफदरजंग अस्पताल में स्वाइन फ्लू के कारण हो गयी।

safdarjung hospitalमहेश गुप्ता को दोपहर में ही सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सफदरजंग अस्पताल इस मरीज को 5 घंटे भी नहीं सम्भाल पाया। शाम को 7:50 पर डॉक्टरों ने महेश को मृत घोषित कर दिया।

2 अक्टूबर से अपोलो में भर्ती थे महेश

महेश को जब खांसी की शिकायत हुई तो उनके परिजन तीन दिनों तक काशगंज व अलीगढ़ के अस्पतालों में इलाज कराते रहे लेकिन जब अलिगढ़ के डॉक्टरों ने उनका लंग्स चेक किया तो पाया कि इंफेक्शन बहुत बढ़ गया है और उन्हें दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। पिछले 2 अक्टूबर को उन्हें दिल्ली के सबसे बेहतरीन कहे जाने वाले अस्पताल अपोलो में भर्ती कराया गया। अपोलो ने 24 घंटे के अंदर ही मरीज को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि कर दी और ईलाज शुरू किया। प्रत्येक दिन परिजनों को लगभग 1 लाख रुपये का खर्च आ रहा था। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से ईलाज के खर्चे में छुट देने की अपील की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस बीच महेश चन्द्र के पुत्र आकाश के दोस्त भरत चौहान ने स्थानीय स्वास्थ्य मंत्री से मिलने की कोशिश की और उनके यहां से एक पत्र भी लेकर आए ताकि अपोलो अस्पताल मरीज का ईलाज न्यूनतम दर पर कर दें। भरत चौहान ने बताया कि अपोलो अस्पताल ने न्यूनतम दर पर ईलाज करने से साफ मना कर दिया।

महेश को स्वाइन फ्लू निगलता रहा और दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री चुप बैठे रहे…

swine flu report

महेश चन्द्र गुप्ता को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि करती अपोलो अस्पताल की रिपोर्ट

दिल्ली में स्वाइन फ्लू का मामला सामने आने पर स्वस्थ भारत अभियान ने स्वास्थ्य मंत्री को उनके मोबाइल न. 9810154102 पर मैसेज कर (दिनांक 5 अक्टूबर, समय- दोपहर 1:20 ) के महेश की स्थिति के बारे में अवगत कराया था लेकिन कोई भी सकारात्मक उत्तर नहीं मिला। स्वस्थ भारत ने जब उनसे बात करने की कोशिश की तो रजत नामक उनके किसी सहयोगी ने फोन उठाया और इस दिशा में उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। आश्चर्य का मामला यह है कि इतना संवेदनशील मामले को स्वास्थ्य मंत्रालय ने हल्के में लिया और आज महेश चन्द्र की मौत हो गई। इस मौत की जिम्मेदारी कौन लेगा?

सफदरजंग ने स्वाइन फ्लू टेस्ट नहीं किया!

देश के बड़े अस्तपतालों में सुमार किए जाने वाले सफदरजंग अस्पताल ने अपने स्तर से महेश चन्द्र की बीमारी को डायग्नोस करने का जोखिम नहीं उठाया। मरीज को स्वाइन फ्लू है कि नहीं है इस बात की वास्तविकता को जांचने की कोई जरूरत अस्पताल ने नहीं समझी। अपोलो की रिपोर्ट के आधार पर ही ईलाज किया गया। एक तरफ दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए कमर कसने की बात मीडिया से कह रहे हैं और दूसरी तरफ स्वाइन फ्लू ने अपना पहला शिकार महेश चन्द्र को बना लिया।

तो क्या स्वाइन फ्लू से लड़ने से लाखों रूपये खर्च करने पड़ेंगे

स्वाइन फ्लू से अपने पिता को बचाने के लिए उनके पुत्रों ने 5 लाख से ज्यादा अपोलो अस्पताल में खर्च कर दिए। तो क्या देश की सरकारें हाथ पर हाथ धरी बैठी रहेंगी? उनका क्या होगा जिनके पास 5 लाख रुपये नहीं हैं? ऐसे में तो उनकी मौत के कारणों का भी पता लगाना शायद संभव नहीं होगा!

स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए यूपी तैयार है!

उत्तर प्रदेश सरकार स्वाइन फ्लू से लड़ने के लिए कितनी तैयार है, इस सिजन का पहला मामला उत्तरप्रदेश से आया है। उत्तरप्रदेश एक तरफ साम्प्रदायिक आग में जल रहा है वहीं दूसरी तरफ स्वाइन फ्लू का हमला हुआ है। ऐसे में अखिलेश सरकार पर अपनी जनता को इस हमले से बचाने की बहुत बड़ी जिम्मेदारी है।

देखें विडियो क्या कहते हैं महेश चन्द्र के परिजन

यूपी के काशगंज जिला का है यह मामला

महेश के परिजनों का कहना है कि महेश कुछ दिन पहले बरेली गए थे शायद वहीं से उन्हें इस विदेशी बीमारी का वायरस लग गया। और अंत में इस वायरस ने महेश की जान ले ली। लेकिन इस वायरस की चपेट में और भी लोग आए होंगे इस लिहाज से बरेली और काशगंज का क्षेत्र बहुत ही संवेदनशील है, वहां के सीएमओ को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। इस बावत उनसे फोनिक चर्चा करने की कोशिश की गयी लेकिन उनका नं. नहीं लगा।

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