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क्यों जरूरी है स्वच्छ भारत के लिए बजट का बढ़ाया जाना

बजट 2016 : स्वच्छ भारत के लिए 9000 करोड़ रुपये का बजट

 

swasch bharat

बजट 2016-17 में सरकार ने 9000 करोड़ रूपये का बजट स्वच्छ भारत अभियान के लिए आवंटित किया है। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह बहुत ही सराहनीय कदम है। इससे देश को स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सच्चाई तो यह है कि किसी भी राष्ट्र के विकास को मापने का उत्तम मानक वहां का स्वस्थ समाज होता है। नागरिकों की स्वास्थ्य का सीधा असर उनके कार्य-शक्ति पर पड़ता है। नागरिक कार्य-शक्ति का सीधा संबंध राष्ट्रीय उत्पादन-शक्ति से है। जिस देश की उत्पादन शक्ति मजबूत है वह वैश्विक स्तर पर विकास के नए-नए मानक गढ़ने में सफल होता रहा है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट हो जाता है कि किसी भी राष्ट्र के विकास में वहां के नागरिक-स्वास्थ्य का बेहतर होना बहुत ही जरूरी है। शायद यही कारण है कि अमेरिका जैसे वैभवशाली राष्ट्र की राजनीतिक हलचल में स्वास्थ्य का मसला अपना अहम स्थान पाता है। दरअसल किसी भी राष्ट्र के लिए अपने नागरिकों की स्वास्थ्य की रक्षा करना पहला धर्म होता है।

स्वास्थ्य: एक चुनौती

जब से मानव की उत्पत्ति हुई है तभी से खुद को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी मानव पर रही है। बदलते समय के साथ-साथ स्वास्थ्य की चुनौतियां भी बदलती रही हैं। वर्तमान में किसी भी राष्ट्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती है राष्ट्र के जनसंख्या के अनुपात में स्वास्थ्य सुविधाओं को मुहैया कराना। इस समस्या से हम भारतीय भी अछूते नहीं है।

यदि हम भारत की बात करें तो 2011 की जनगणना के हिसाब से 1 मार्च, 2011 तक भारत की जनसंख्या का आंकड़ा 1 अरब 21 करोड़ पहुंच चुका था व निरंतर इसमें बढ़ोत्तरी हो रही है। हालांकि जनसंख्या की औसत वार्षिक घातीय वृद्धि दर तेजी से गिर रही है। 1981-91 में यह 2.14 फीसद, 1991-2001 में 1.97 फीसद था वहीं 2001-11 में यह 1.64 फीसद है। बावजूद इसके जनसंख्या का यह दबाव भारत सरकार के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्थित व्यवस्था करने बड़ी मुश्किलों को पैदा कर रहा है।[i]

स्वास्थ्य और स्वच्छता में संबंध

ठीक से देखें तो कई ऐसी बीमारियां हैं जिनका प्रत्यक्ष संबंध साफ-सफाई की आदतों से है। मलेरिया, डेंगू, डायरिया और टीबी जैसी बीमारियां इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताते हैं कि अकेले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पिछले 6 वर्षों में टीबी से 46,606 लोगों की जाने गयी हैं। अर्थात् देश की आर्थिक राजधानी में केवल टीबी से प्रत्येक दिन 18 लोग अपना दम तोड़ रहे हैं। बिहार के मुज्जफरपुर, यूपी के गोरखपुर क्षेत्र व पश्चिम बंगाल के उत्तरी क्षेत्रों में जापानी बुखार से लगातार बच्चों की मौत हो रही है। जुलाई-2014 के दूसरे सप्ताह में त्रिपुरा में मलेरिया से मरने वालों की संख्या 70 से ज्यादा हो गयी थी और 30 हजार से ज्यादा लोग मलेरिया की चपेट में थे। ये सभी बीमारियां ऐसी हैं जिनसे बचाव स्वच्छता में अंतर्निहित है।

इतना ही नहीं शरीर के स्वस्थ रहने के लिए हर स्तर पर स्वच्छता आवश्यक है और इस तथ्य को हमारे महापुरूषों ने भी लगातार स्वीकारा है। जिन महात्मा गांधी के जन्म दिवस पर स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया गया वही महात्मा स्वास्थ्य का नियम बताते हुए कहते हैं, “मनुष्य जाति के लिए साधारणतः स्वास्थ्य का पहला नियम यह है कि मन चंगा तो शरीर भी चंगा है। निरोग शरीर में निर्विकार मन का वास होता है, यह एक स्वयं सिद्ध सत्य है। मन और शरीर के बीच अटूट संबंध है। अगर हमारे मन निर्विकार यानी निरोग हों, तो वे हर तरह से हिंसा से मुक्त हो जाए; फिर हमारे हाथों तंदुरूस्ती के नियमों का सहज भाव से पालन होने लगे और किसी तरह की खास कोशिश के बिना ही हमारे शरीर तन्दुरुस्त रहने लगे।’[ii] ( व्यास, 1963, पृ.181)

स्वच्छता और स्वास्थ्य के संबंधों को रेखांकित करते हुए गांधी ने निरोग रहने के लिए ‘ग्राम स्वराज’ में कुछ नियम सुझाएं हैं, जो निम्नवत हैः-

-हमेशा शुद्ध विचार कीजिए और तमाम गंदे और निकम्मे विचारों को मन से निकाल दीजिए।

-दिन-रात ताजी-से-ताजी हवा का सेवन कीजिए।

-शरीर और मन के काम का तौल बनाए रखें, यानी दोनों को बेमेल न होने दें।

-आप जो पानी पिएं, जो खाना खाएं और जिस हवा में सांस लें, वे सब बिल्कुल साफ होने चाहिए। आप सिर्फ अपनी निज की सफाई से संतोष न मानें, बल्कि हवा,पानी और खुराक की जितनी सफाई आप अपने लिए रखें, उतनी ही सफाई का शौक आप अपने आस-पास के वातावरण में भी फैलाएं।[iii] (व्यास, 1963, पृ.182)

गांधी स्वास्थ्य को न केवल भौतिक स्वच्छता से जोड़ते हैं बल्कि वह आंतरिक स्वच्छता के पहलु को भी यहां रेखांकित करते हैं। उनका यह विचार निम्न पंक्तियों में प्रतिबिम्बित होता है। ‘मेरी राय में जिस जगह शरीर-सफाई, घर-सफाई और ग्राम-सफाई हो तथा युक्ताहार और योग्य व्यायाम हो, वहां कम से कम बीमारी होती है और अगर चित्तशुद्धि भी हो तब तो कहा जा सकता है कि बीमारी असंभव हो जाती है। राम नाम के बिना चित्तशुद्धि नहीं हो सकती। अगर ग्रामवासी इतनी बात समझ जाए, तो उन्हें वैद्य, हकीम या डॉक्टर की जरूरत न रह जाए।’[iv] ( व्यास, 1963, पृ.183)

 

 

अस्वच्छताजनित प्रमुख बीमारियां

अस्वच्छता को तो बीमारियों का जनक कहा जाता है। पिछले कुछ दशकों में भारत में अस्वच्छताजनित बीमारियों में डेंगू, मलेरिया और टीबी ने बहुत नुक्सान किया है। भारत में इन बीमारियों की वर्तमान स्थिति का वर्णन नीचे किया जा रहा हैः-

मलेरिया

इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार वेक्टरजनित बीमारियों में मलेरिया अपनी भयावहता की कसौटी पर प्रथम स्थान पर है। वर्ष 1953 में राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम (एनएमसीपी) के शुरू होने से पहले, मलेरिया से लगभग 75 लाख लोग प्रभावित थे और यह बीमारी 8 लाख मौतों का कारण थी। राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम 1965 आते-आते सफलता के सोपान छू रहा था, मलेरिया से मरने वालों की संख्या शून्य पर जा पहुंची थी लेकिन 1976 में मलेरिया ने फिर से अपना सिर उठाया और इसकी चपेट में 64 लाख लोग आ गए और बड़ी संख्या में मौत हुई। इसके बाद राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (एनएमईपी) की शुरूआत की गयी। फिर नेशनल एंटी मलेरिया कार्यक्रम (एनएएमपी) चलाया गया। फिलहाल राष्ट्रीय वेक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीबीडीसीपी) चलाया जा रहा है। 2007-11 के दौरान मलेरिया के मामले 13-16 लाख के बीच रहे हैं।[v]

डेंगू

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 16 जनवरी, 2013 के वक्तव्य में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर डेंगू पिछले 50 वर्षों में 30 गुणा तेजी से बढ़ा है। भारत भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहा है। इसका उदाहरण है कि 2012 में पूरे देश में 47029 डेंगू से प्रभावित मरीज पाए गए जबकि 242 डेंगू प्रभावित मरीजों की मौत हो गयी।[vi] दिल्ली और मुंबई हर साल डेंगू के मामले बड़ी संख्या सामने आते हैं और इन शहरों में तो अस्पताल तथा सरकारी विभाग बकायदा नियमित तौर पर डेंगू के मामलों की बुलेटिन भी जारी करते रहते हैं।

टीबी

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार-2012 में वैश्विक स्तर पर टीबी के 86 लाख नए मामले दर्ज किए गए और 13 लाख लोगों की टीबी से मौतें हुईं। टीबी से होने वाली मौतों में से 95 प्रतिशत से अधिक मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि 15-44 आयु वर्ग के महिलाओं की मौत के शीर्ष तीन कारणों में से एक टीबी भी है।[vii] इंडियन कौंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में लगभग 20-23 लाख लोग प्रत्येक साल टीबी से ग्रसित होते हैं जो कि वैश्विक टीबी मरीजों का 26 फीसद है। इस रोग से भारत में तकरीबन 3 लाख लोग प्रत्येक साल काल के गाल में समा रहे हैं।[viii]

जल स्वच्छता

अब तक हमने देखा कि स्वास्थ्य के लिए जल व जलस्रोतों की स्वच्छता एक आवश्यक पहलू है। इस दृष्टि से पेय जल एवं स्‍वच्‍छता मंत्रालय ने 1508.76 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 1649 ग्राम पंचायतों को गंगा नदी के किनारे खुले में शौच करने से मुक्‍त करने के लिए एक कार्य योजना तैयार की है। इसके अतिरिक्‍त, गंगा नदी के किनारे स्थित 118 शहरी निवास स्‍थलों पर सीवरेज अवसंरचना को उचित कवरेज हेतु विस्‍तारित करने के लिए शहरी विकास मंत्रालय द्वारा अस्‍थायी रूप से अभिज्ञात किया गया है।[ix] वहीं दूसरी तरफ सरकार ने 2022 तक देश के सभी ग्रामीण लोगों को सुरक्षित पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाया है।

लोकसभा में सरकार ने बताया है कि 17 लाख घरों को 2022 तक पेयजल सुविधाएं दी जाएगीं। ग्रामीण विकास और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री ने बताया कि देश में 78 हजार गांवों में प्रदूषित जल जैसे फ्लोराइट, आर्सेनिक तथा अन्य भारी धातु की गंभीर समस्या है और सरकार की प्राथमिकता इस समस्या से युद्ध स्तर पर निपटने की है। पंजाब में दूषित जल के कारण कैंसर की बीमारी पर पंजाब के सांसदों की चिंताओं को दूर करते हुए सरकार ने लोकसभा में बताया कि राज्य सरकारें दूषित जल की समस्या से निपटने के लिए आवंटित बजट का 67 प्रतिशत इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।[x] सरकार ने जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (एनडब्ल्यूएमपी) के अंतर्गत देश में जलीय संसाधनों की जल गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। इस निगरानी नेटवर्क में 445 नदियां, 154 झीलें, 12 कुण्ड, 78 तालाब, 41 संकरी खाड़ियां/समुद्र जल, 25 नहरें, 45 नाले, 10 जल शोधन संयंत्र (अशोधित जल) और 805 कुएं शामिल हैं। कर्नाटक में 63 केन्द्रों पर जल गुणवत्ता की निगरानी की जाती है जिनमें से 61 नदियों पर और 2 झीलों पर हैं। वर्ष 2012 के दौरान प्राप्त निगरानी परिणामों से पता चलता है कि जैविक प्रदूषण अभी भी जलीय संसाधनों का सबसे बड़ा प्रदूषक है। जल गुणवत्ता की बहाली के लिए केन्द्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 का कार्यान्वयन किया जा रहा है।[xi]

 

जलजनित बीमारियां

 

श्रेणी

 

1-पानी के प्रयोग के कारण होने वाली बीमारियां

 

 

 

 

 

 

 

2-आंतो में बुखार ( इंटरिक फीवर )

 

 

 

 

 

 

 

3-पानी से धोने के कारणःत्वचा व आंखों में संक्रमण

संक्रमण

 

डायरिया व डिसेंट्रिज

·         एमबियासिस

·         कैमपीलोबैक्टर इंटरिटिज

·         कोलेरा

·         ई-कोली डायरिया

·         रोटा वायरस डायरिया

·         सालमोनिलोसिस

·         सिजेलोसिज (बेसिलरी डिसेंट्री)

इंटरिक फीवर

·         टायफाइड

·         पाराटाइफाइड

·         पोलीमाईलाईटिस

·         एसकारिआसिस

·         ट्राईचुरिआईसिस

·         टैक्निया सोलियम टेनिआसिस

पानी से धोने के कारण

·         त्वचा संबंधी रोग

·         आंखों में संक्रमण

·         लाउस-बोर्न-टाइफस

 

सोर्सःइनवारमेंटल साइंस, एस.सी.संतरा (टेक्स्ट बुक)

 

निष्कर्षः
ऊपर की चर्चा से स्पष्ट होता है कि स्वच्छ भारत के लिए बजट का होना कितना जरूरी है। मैं व्यक्तिगत रूप से सरकार के इस पहल का स्वागत करता हूं। बस देखना यह है कि इस बजट का उपयोग किस तरीके से देश को स्वस्थ बनाने में हो पाता है।

[i] p.12,ANNUAL REPORT to the PEOPLE on Health Government of India, Ministry of Health and Family Welfare, December 2011

[ii] (व्यास, हरिप्रसाद 1963: ग्राम स्वराज्य-महात्मा गांधी, नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद, पृ.179-83,)

[iii] (व्यास, हरिप्रसाद 1963: ग्राम स्वराज्य-महात्मा गांधी, नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद, पृ.179-83,)

 

[iv] (व्यास, हरिप्रसाद 1963: ग्राम स्वराज्य-महात्मा गांधी, नवजीवन प्रकाशन मंदिर, अहमदाबाद, पृ.179-83,)

[v] Disease Specific Documents for XII PlanDengue/Chikungunya/High Power Committee to Evaluate the Performance of ICMR, 2012-13/Annexure XV/ Indian Council of Medical Research, New Delhi

[vi] Disease Specific Documents for XII PlanDengue/Chikungunya/High Power Committee to Evaluate the Performance of ICMR, 2012-13/Annexure XV/ Indian Council of Medical Research, New Delhi

[vii] (http://www.who.int/campaigns/tb-day/2014/event/en/)

 

[viii] Disease Specific Documents for XII PlanDengue/Chikungunya/High Power Committee to Evaluate the Performance of ICMR, 2012-13/Annexure XV/ Indian Council of Medical Research, New Delhi

[ix] पीआईबी रिलीज, जल संसाधन मंत्रालय/27.11.14

[x] पीआईबी रिलीज/ग्रामीण विकास मंत्रालय/ 27.11.2014

[xi] पीआईबी रिलीज/ पर्यावरण एवं वन मंत्रालय/ 26.11.14

आशुतोष कुमार सिंह
आशुतोष कुमार सिंह भारत को स्वस्थ देखने का सपना संजोए हुए हैं। स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर पत्र-पत्रिकाओं में अनेक आलेख लिखने के अलावा वह कंट्रोल एमएमआरपी (मेडिसिन मैक्सिमम रिटेल प्राइस) तथा 'जेनरिक लाइये, पैसा बचाइये' जैसे अभियानों के माध्यम से दवा कीमतों व स्वास्थय सुविधाओं पर जन जागरूकता के लिए काम करते रहे हैं। संपर्क-forhealthyindia@gmail.com, 9891228151
http://www.swasthbharat.in

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